सरकार संग आती थी हर रोज उनकी फोटो संचार के माध्यम से बैंक हिम्मत न जुटा पाया कर्ज देने से इंकार करने की आज सभी बैंक मूर्छित हैं उनके विदेश गमन से थोड़ी-थोड़ी संजीवनी चोरी-छुपे ली जा रही है आम-जन के खातों से ताकि होंस में लाए जा सकें बैंक […]

बचपन में मेरे मित्र थोड़ी सी अनबन होने पर दुखाने के लिए मेरा दिल मेरे मिट्टी के खेल-खिलौने तोड़ देते थे लेकिन आजकल के मित्र थोड़ी सी अनबन में दिल ही तोड़ते हैं शायद आजकल यही सबसे अच्छा खिलौना है #विनोद सिल्ला   जीवन परिचय   विनोद सिल्ला  माता का […]

मेरे पङौस की हवेली खाली पङी है अब तो शायद चूहों ने भी ठिकाना बदल लिया कभी यहाँ चहल-पहल रहती थी उत्सव सा रहता था लेकिन आज इसके वारिश कई हैं जो आपस में लङते रहते हैं संयुक्त परिवार टूटने का दुख इस हवेली को भी है #विनोद सिल्ला   […]

पशु आपस में लङते हैं खूब पंछी भी आपस में भिङते हैं खूब कीट-पतंग भी करते हैं संघर्ष इनके गुण इनके स्वभाव इनकी आदत इनका खानपान इनकी प्रवृत्ति अलग-अलग हैं पर इनमें छूत-अछूत अगङे-पिछङे हिन्दू-मुस्लिम अमीर-गरीब छोटे-बङे श्वेत-अश्वेत का भेद नहीं मात्र इन्सान ही है संवेदनहीन क्यों????? #विनोद सिल्ला   […]

कोई अपनी जात पे मेहरबान था कोई अपनी बात पे कुर्बान था किसी का अपने धर्म पे बलिदान था किसी को मराठी होने का गुमान था किसी को अपनी पंजाबियत का मान था तो कोई अपने गुजरात की शान था किसी के भाषावाद पे मैं हैरान था किसी का अलगाववादी […]

कर लिए कायम दायरे सबने अपने-अपने हो गए आदि तंग दायरों के कितना सीमित कर लिया खुद को सबने नहीं देखा कभी दायरों को तोड़ कर अगर देख लेता तोड़ कर इनको तो हो जाता उन्मुक्त पक्षियों की तरह जिन्हें नहीं रोक पाते छोटे-बड़े दायरे नहीं कर पाती सीमित इनकी […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।