“लिये है सात फेरें सात वचनो को निभाऊँगी जाओगें जब सरहद पर आँसू नही बहाऊँगी तुम लौटकर आओ तो हाथों में तिरंगा रखना खाली नहीं आना…. चाहे तिरंगा ओढ़़कर आना” ………………………… किया था तुमने वादा वादा है तुमने निभाया सीने पर खाकर गोली वतन को अपने बचाया उजड़ा है सिन्दुर […]

धर्म अलग हो सकते है किंतु इन्सान वही है जो इन्सान को ही बाँट दें वह ‘धर्म’ नहीं है, कोई ‘नमाज’ पढ़े कोई ‘यज्ञ ‘करे ‘हाथ ‘ वही है, सर झुकाओ या घुमाओ ब्रह्माण्ड वही है धूप वही है,छांव  वही है ‘पूजा’ करो या ‘इबादत’  इन्सान वही है, चलकर देखो […]

2

बैठी हूँ मैं आस लगाऐ मुन्ना कब घर आयेगा थक गई है,बुढ़ी आँखे कब तक मुझे सतायेगा बड़ा नटखट था बचपन में सरपट दौड़ लगाता था भागी-भागी मैं तेरे पीछे तु फिर भी निकल जाता था देखकर भूखा तुझको मुन्ने मैं भूखी ही सो जाती थी उठकर रोता रात को […]

चाँद तक जाकर,आ गये सूरज पर अब तक जा न सके धरती को तुमने नाप लिया लहरों की गिनती बता न सके चीर दिया मानव शरीर खून , तुम बना न सके कितने दीप जलाये तुमने नेत्रज्योति दिला न सके खोज तुम्हारी अब भी अधूरी मृत्य पर विजय पा न […]

बहती मेरी कल-कल धारा श्वेत रंग मे रंगी हुई सी है पवित्रता समेटे हुऐ फिर भी देखो ठगी हुई सी ……………………… करते है,पवित्रता की बाते मुझको ‘गंगा माँ’ कहते है खाते है सौगन्ध मेरी गर्व से सीना फुलाते है …………………….. मै तो आई थी पत्थरों से सर अपना टकराकर राह […]

      साहित्य समाज का दर्पण है यह तो हमें अभी कहना नहीं पड़ेगा । साहित्य जाति धर्म का वाहक है । साहित्य के बिना हम किसी जाति संस्कृति अथवा धर्म को समझ नहीं पायेंगे ।      महान हिंदी साहित्यकार माननीय मुंशी प्रेमचंद जी के कहना है “जिस […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।