कुछ रिश्तों के कोई नाम नहीं होते, गुमनाम भटकते, अंजाम नहीं होते। खुले आसमान में उड़ते रहने की सोच, कोई इनके,आसमानी दायरे नहीं होते। ख्यालों की धुंध में जीने की हो चाहत, पलभर की खुशियाँ, हल्की-सी राहत। हवाओं में तराशे भावनाओं के बादल, यर्थाथ के झोंके, बिखरता आत्मबल। जिन्दगी से […]

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गांधी जयन्ती के अवसर पर जब सारा देश सफाई आंदोलन के अभियान पर झाडू उठाए सड़कों पर उतर आया था,मैं अपने एक रिश्तेदार से मिलने मेरठ के एक गाँव में गया। मेहमानदारी और आवभगत हुईl बच्चे और उनके माता-पिता मिलकर बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने बड़े शौक से अपने एक छोटे […]

इधर सोशल मीडिया पर  ‘कौए-कोयल’ के नाम पर जारी नए पुराने हिसाब चुकाने का खेल देखकर लगता है,जैसे इस बार शीत के बाद ‘बसंत’ नहीं, ‘पतझड़’ आ गया हो। पिछले दिनों बेशक कुछ अलग कारणों से ही सही, साहित्य जगत में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए,लेकिन वे विवादों में उलझकर अपने उद्देश्य […]

उपन्यास अंश आज सुबह आँख खुलने के साथ ही एल्विस को काकी की याद आई। वैसे काकी की याद तो उसे रोज ही आती थी, मगर आज रात उसने सपने में काकी को देखा था। वे कह रही थी – ‘बेटा, मैं शिप्रा के प्रवाह में हूँ…शिप्रा की लहरों में […]

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|| समाचार विज्ञप्ति || मातृभाषा केवल पोर्टल नहीं बल्कि भविष्य में हिन्दी के विस्तार हेतु आंदोलन बनेगा इंदौर । भाषा के विस्तृत सागर में ‘हिन्दी’ भाषा के प्रति प्रेम और उसी भाषा की लुप्त होने की कगार पर खड़ी विधाएँ खास कर रिपोतार्ज, संस्मरण, पत्र लेखन, लघु कथा, डायरी, आदि को बचा कर […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।