पिता से अस्तित्व मेरा,पिता हैं जीवन बीज, गुरु बनकर दी,सन्मार्ग की मुझको सीख़। संघर्ष सिखाया और जगाया मेरा स्वाभिमान, प्रतिछाया हूँ उनकी,पिता से मेरी पहचान। पीड़ा  जब होती मुझको,तो सह नहीं पाते थे, बिन देखे मुझको,दो पल रह नहीं पाते थे। जतन से सम्भाला मुझको,दिया स्नेह दुलार, छूटा जब  साथ […]

  दीवारों के हिस्से अनुशासन के, तोड़फोड़ का हुआ धमाका हैl   आँखें सूजी हैं फागुन की, किस्से बदल गए बातचीत की दीवारों के हिस्से बदल गए, तिड़कझाम से भरा हुआ यह सघन इलाका हैl   त्योहारों की साँस-साँस पर भृकुटी के पहरे, मेलजोल की शहनाई के कान हुए बहरे, […]

शब्द-शब्द में, चंद सांसें छिपा रखी हूँl  सजल आँखों के गीले कोर पे बस तुम्हें छुपा बैठी हूँl    दिल की बंद सीपियों में यादों की गठरी से,  निकाल एक-एक मोती रोज़ गूँथती हूँ जी रही हूँ बस कि,  सांसें अकेली ना पड़ जाएl    इश्क के रंग से रंजित  […]

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अधर हँसीं के पहरे धरकर,दर्द छुपाती सीने में। नहीं शिकायत करती चाहे,हो कठिनाई जीने में। जिस घर लेती जन्म सुता वो,बड़े नसीबों वाले हैं। बेटी के घर आते ही,खुलते किस्मत के ताले हैं। पारसमणि-सी प्यारी बेटी है अनमोल नगीने में। अधर हँसी के पहरे धरकर,दर्द छुपाती सीने में……….l बेटी है […]

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डाल कटी तो बरगद रोया, उतरी छाल न पीपल सोया कटहल जामुन आम अभागे, निम्ब वृक्ष ने धीरज खोयाll   साथ मिला अमरूद डाल का, चली कुल्हाड़ी खट्टम खट गिरीं डालियाँ सब कट-कटll   घहर घहर घहराया कटहल, हहर हहर हहराया पीपल ठूँठ हुई बरगद की छाती, सूना हुआ धरा […]

वामपंथ को आज भारत में शक की निगाहों से देखते हुए इसको सीधा-सीधा उग्रवाद से संबद्ध करते हुए उपद्रवी,बाग़ी और आतंकवादी प्रवृत्तियों के निकट लाकर देखा जा रहा है,लेकिन इस तरह से देखने के दो स्पष्ट कारण दिखाई देते हैं। पहला यह कि परंपरावादी प्रारम्भ से वामपंथ के विरोध में […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।