जीवन दर्शन करवाती है….

1
Read Time1Second
sandip sharma
‬अन्तःस्थल में उठती भाव रुपी लहरें,
जब अनवरत हिलोरे खाती है।
तब मानस पटल पर सहसा ही,
कविता अंकित हो जाती है।
हो जाए तो क्षण भर में ही,
अन्यथा लम्बी यात्रा करवाती है।
कभी कल्पना की उड़ान के साथ
तो कभी निज अनुभवों को गाती है।
कभी किसी दूसरे पर बीती हुई,
कभी स्वयं पर बीती सुनाती है।
कभी चिंतन की रेखा छूकर,
जीवन दर्शन करवाती है।
कभी मानवता के आदर्शों से,
शब्दों से परिचय करवाती है।
उन्मुक्त गगन में उड़ती-सी,
अपनी यात्रा कर जाती है।
इतिहास के अमिट पन्नों पर,
अपना गौरव लिखवाती है।
कभी प्रेरणा देकर जग को,
सृजनशीलता बढ़ाती है।
कभी अंगारों-सी दहक कर,
विसंगतियों को जलाती है।
कभी हृदय की पीर समझ,
अवसादोंं को मिटवाती है।
कभी भक्तिरस पूरित होकर,
ईश्वर वन्दन कर जाती है।
कभी श्रद्धा का स्वरुप बन,
मात- पिता को शीश झुकाती है।
कभी हास्य रस को समेट,
रोम-रोम पुलकित कर जाती है।
कभी करुणा को धारण कर
नयनों से अश्रु बहाती है।
कभी आत्मतत्व का ध्यान लगा,
हृदय में ज्योति जगाती है।
कविता शब्द सामान्य नहीं,
यह ब्रह्मानन्द की ओर ले जाती है।
कविता जीवन की सहचरी बन
जीवन को धन्य कर जाती है॥
                                                                               #संदीप शर्मा
परिचय : संदीप शर्मा की शिक्षा-शास्त्री (बी.ए.),शिक्षा शास्त्री(बी.एड)है,और आचार्य के लिए अध्ययनरत(एम.ए.)हैं। आप वेदों का अध्यापन कराते हैं। निवास मध्यप्रदेश के गांव-भँवरासा (तह.जीरन,जिला नीमच) में है।
0 0

matruadmin

One thought on “जीवन दर्शन करवाती है….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

इबादत वतन की...

Fri Jul 14 , 2017
इबादत वतन की सभी हम करेंगे, शहादत करें तो नहीं गम करेंगे। वतन वास्ते जान जाए भले ही, कि आँखें कभी हम नहीं नम करेंगे। सुनो यार अपने वतन की कहानी, मेरे दुश्मनों की नाक में दम करेंगे। हमारे इरादे अगर नेक हैं तो, करें आचमन गंग जमजम करेंगे। अमरनाथ […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।