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आईने पर यक़ीन रखते हैं , वो जो चेहरा हसीन रखते हैं| आंख में अर्श की बुलन्दी है , दिल में लेकिन ज़मीन रखते हैं| दीन-दुखियों का है खुदा तब तो , आओ हम खुद को दीन रखते हैं| जिनके दम पर है आपकी रौनक  , उनको फिर क्यों मलिन […]

घुटन के साथ तमन्नाओं का जैसे मचलना है, एक जुगनू का घोर अंधरों में जैसे चमकना है। एक लकीर-सी खिंची है जो क्षितिज में, अब उड़कर उसको भी पार करना है। अपने ही द्वन्द में पछाड़ खाते हैं बार- बार, लगता है लिखा अपने हाथों ही मारना है। एक बहरुपिया […]

नकली समर्थकों ने भी पाला बदल लिया, कट्टे-छुरी को छोड़ के माला बदल लिया। कल तक समाजवाद सर्वजन के थे वकील, चाबी गई जो हाथ से ताला बदल लिया। #आशुकवि नीरज अवस्थी परिचय : आशुकवि नीरज अवस्थी का जन्म 1970 में हुआ है।परास्नातक (राजनीति शास्त्र)और तकनीकी शिक्षा (आईटीआई- इलेक्ट्रीशियन) हासिल […]

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उलझनों के झुनझुने में अटकी, किसी चौराहे पर.. मेरे ही खिलाफ चौरंगी सी खड़ी, यह औढर जिंदगी। क्या पता किस ओर करवट ले जाए, किस ओर नहीं, या फिर बढ़ चले सन्नाटे को चीरती हुई मृग मरीचिका.. लिए हुए,बेमतलब के ख्वाब दिखाते हुए,बेपता है यह, देखा है कि,इसने जो भी […]

हे रंग आज बरस तू बादल बनकर,,, अंग भिंग जाये तुम्हे कही सुनकर,,, लाल भी आये तुम्हारे गालो के लिए छुपकर,,, नीलले काले भी गिरे आज रुक रुककर,,, गोरी गाल ना छिपाये हमे शर्माकर,,, झरोखों की दिशाएं हर को ले जाये बहाकर,,, हे रंग आज बादल बन बरसना हमपे आज […]

रंग दिखलाऊँ अब कौन-सा, दर्शाएगा जो मेरी छवि को.. भड़कीला ज्यादा ना लगे जो भा जाए हर एक किसी कोl . रंग कहूँ सूरज-सा मुझको, भाता है रातों में तो क्या.. कहूँ जो धोया काला रंग, दौड़ता है दिन में तो क्याl . सच तो है एक रेखा पीली-सी, भाती […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।