सृजन की भावनाओं का नवल संसार पुलकित हो। विजय की प्रार्थना का रम्य पारावार पुलकित हो॥ अलक्षित प्रीति के बादल गगन की रागिनी के संग। भिगोएं लक्ष्य के आंगन तो हर घर द्वार पुलकित हो॥ शहीदों की प्रबल अनुपम विजय का गान पुलकित हो। सभी वेदों व धर्मों से मिला […]

आओ इन जीर्ण दरख्तों में थोड़ी-सी जान फूंकते हैं, इनके अंतस की पीड़ा को स्वर-लय दे आज़ हूँकते हैं। शायद कोई तो समझ सकेगा, दर्द मौन आशाओं का.. या फ़िर बन जाएगा कोई, अनुगामी अभिलाषाओं का। भू का कम्पन समझे कोई, आवेश समझ ले अम्बर का.. कुदरत की हर पीड़ा […]

दिल की खुली किताबों पर, मैं प्रियवर तेरा नाम लिखूं। इसके हर कोरे पन्ने पर तेरे, संग महकती शाम लिखूं।। जीवन के कोरे कागज़ हैं, जो तुम आओ तो रंग खिले। तेरे संग चले मेरी साँसें,तेरे साथ ही पूर्ण विराम लिखूं।।                   […]

बिना पहचान-पत्र न जाने, यंत्र उँगली को कहाँ पहचाने; तंत्र से जुड़ा हुआ जब जाने, तभी दरवाज़ा खोलना जाने। करना पंजीकरण प्रायः होता, लेना चिप वाला कार्ड भी होता; उसी से पात्र संस्था जुड़ता, सभी सुविधाएँ भोग कर पाता । तंत्र सब विश्व-तंत्र विच होते, यंत्र पर उनके अलहदा होते; […]

अमृतसे भरा है दिल मेरा, जो सागर जितना सत पूनमचंद के पप्पू के पास बुजुर्ग माँ लिखाती खत.. पप्पू उसका मुंबई गांव में, परेश भाई प्रेमजी नामे लिखती हैं मैया। पाँच बरस में पहुँची नहीं, एक पाई.. कागज की एक चिट्ठी भी, नहीं मिली मेरे भाई.. समाचार सुन के तेरा […]

आओ आज हम एक नया काम करते हैं, ये दिन भूखे-गरीबों के नाम करते हैं। कुछ रोटियां और कुछ कपड़े जुटाते हैं, चलो आज उनकी हसीं ये शाम करते हैं। उद्योगों के सृजन की भूमिका निभाते हैं, श्रमिक निज लगन से उसको सफल बनाते हैं। आओ उनकी मेहनत को सलाम […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।