2

जोकर, एक असाधारण व्यक्तित्व का.. साधारण-सा नाम, शायद इसीलिए आसान नहीं होता.. जोकर हो पाना, वैसे कोई चाहता भी नहीं जोकर बनना, जोकर कहलाना, क्यूंकि, हर कोई चाहता है खिलखिलाना-मुस्कुराना.. पर दूसरों पर, खुद पर हँसने और खुद पर हंसाने का माद्दा हर किसी में नहीं होता और जिसमें होता […]

टूट गया आखिर, दिन के दरिया पे बना शाम का बाँध, रात का सैलाब बह निकला.. और ख्वाबों के सितारों का शहर डूब गया जहाँ, रहते थे कई मासूम जज़्बात। चाँद की कश्ती, अब तैर रही है.. जो निकली है ढूँढने, बच गए हों जो कोई.. ज़िन्दा जज़्बात। सुबह के […]

मत रुठ आज मुझसे मेरे हमजोली, खेलेंगे आज तो हम संग तेरे होली। आई है फिर ये रुत बड़ी ही सुहानी, न करना मेरी बातों से आनाकानी। आजा मेरी जां कहीं ये रैना न बीते, खेलेंगे आज तो हम संग तेरे होली। कौन-सा रंग मल दूँ तुझे जरा ये बता, […]

होरी की खुमारी में मैं डूब रही सखी, बोल न कैसे मनाऊँ अबके होरी….? रंग ले आऊँ जाय के हाट से,चल मोरे संग..।लाल रंग लगवाऊँ के,पीरा… हरा रंग चपखीला..के गुलाबी नसीला! ऐ सखी बोल न….कुछ तो बोल…?? प्रीत की ये पहरी होरी है रे! मन बौराया है,सुध-बुध हार बैठी हूँ…।पर […]

जीवन में जब बढ़ने लगे वियोग, अनेक रोग जब कर रहे भोग.. जब शरीर को करना हो निरोग, तो एक ही रास्ता है योग। सांसों को जब लगाना हो आयाम, तो करे मानुष थोड़ा प्राणायम.. आसन से आती सकारात्मकता, ध्यान से दूर होती नकारात्मक्ता। जब शरीर को करना हो निरोग, […]

सोने के टुकड़े की लोहे के टुकड़े से होती है मुलाकात, वो करते हैं एक-दूसरे से मीठी-मीठी बात। सोने का टुकड़ा कहता है- तू इतना क्यों चीखता-चिल्लाता है,जब तुझे लोहे के हथौड़े की मार पड़ती है, मैं इतना नहीं चीखता-चिल्लाता हूँ, जब मुझे पीतल के हथौड़े की मार पड़ती है। […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।