1. पेड़ लगाओ संतुलन बनाओ सृष्टि बचाओ 2. गिरा देती है ओछी मानसिकता मानवता को 3. हरे हो जाते चुनाव समय में वादों के पौधे 4. सूख जाते हैं कुर्सी पर आते ही वादों के पौधे 5. तैयार खड़े स्वागत करने को फूल लेकर #अशोक कुमार ढोरिया मुबारिकपुर(हरियाणा) Post Views: […]

बड़ी ही शिद्दत से मेरी कलम ने मन से रिश्ता निभाया है। हर एक दर्द मन का कलम से उतर कर पन्नो आया है ।। जीवन के अलग अलग रंगों का पन्नो पर इंद्रधनुष बनाया है। ये कलम का कमाल है कि आसमाँ पन्नो पर उतर आया है।। जो भूली […]

मातृदिवस के शुभ अवसर पर, बोल उठी बिटिया रानी। हे माते! तुम बेटी बन जा और बनूँ मैं मातु सयानी।। तुम जाकर बाहर खेलो माँ, जैसे रोज खेलती मैं। बापू से पहले आ जाना, रोटी आज बेलती मैं।। सही तरह से बेटी बनना, नाक हमारी कटे नहीं। सभी बड़ों की […]

गानों  की कल्पना,राग,संगीत के साथ गायन  की मधुरता  कानो  में मिश्री घोलती  साथ ही साथ मन को प्रभावित भी करती है | गानों का इतिहास भी काफी पुराना है | रागों के जरिए दीप का जलना, मेघ का बरसना आदि किवदंतियां प्रचलित रही है ,वही गीतों  की राग ,संगीत  जरिए  घराने भी […]

 *तुमने तो दीवार उठा दी आंगन में, इसमें खिड़की-दरवाजा दोनों लाओं- अंसारी* इंदौर | साहित्यिक संस्था ‘क्षितिज’ एवं ‘मातृभाषा उन्नयन संस्थान’, इंदौर के संयुक्त तत्वावधान में एक रचना पाठ संगोष्ठी का आयोजन डी क्यू कैफे पर किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि चरण सिंह अमी के द्वारा की गई। इस […]

मै तो लब्ज हूँ असर छोड जाऊँगा चंद लम्हों में वक्त के सिलवटों पर नाम लिख जाऊँगा। उलझना है उलझ जाओ सही रास्तो में मैं ही नजर आऊँगा मैं तो लब्ज हूँ। बात खुद्दारी की है जो मुझमें ही जिन्दा है इंसा नहीं हम जो देखते ही बदल जाऊँगा मैं […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।