गैरों से गिला नहीं मुझको,, मुझे अपनो ने ही रुलाया है,, लगा के सीने से उन्होने फिर,, खंजर मुझे चुभाया है,,, समंदर में जो लेके उतरे थे,, उनपे भरोसा जायज था,, रिश्तों का था हवाला,, बेफिक्री में डर भी गायब था,, कश्तीं के जो मेरी मांझी थे,, उन्होने ही मुझे […]
