पहले शासक भेष बदलकर आमजनता के बीच जाते थे किसकी, क्या, समस्या है मौके पर देखकर आते थे अब शासक आमजनता से बेहद की दूरी बनाता है आमजनता के बीच जाने पर खाकीवर्दी बीच मे लाता है आमजन तो मिल ही नही पाते खास भी धकियाये जाते है जो अधिकारियों […]

बुजुर्ग घर की रौनक बढाते है घर का रक्षा कवच कहलाते है बुजुर्ग अनुभव का खजाना है बहुत खलता उनका जाना है जीवनपर्यंत उन्हें सम्मान दो उनकी इच्छा को अधिमान दो खराब नक्षत्र ठीक हो जायेगे बिगड़े सारे काम बन जायेगे बुजुर्ग सेवा का फल मिलता है घर का कोना […]

मैं और मेरे मे भेद है भारी आत्मा हूँ मैं और शरीर बाहरी मैं हूं एक ज्योति बिंदु आत्मा उसी रूप मे मिलते परमात्मा शरीर मेरा रथी कहलाता आत्म ऊर्जा से जीवन नाता देहाभिमान मे रहना छोड़ो आत्म बोध का मधुर रस घोलो विदेहीपन मे जो खो गया वही परमात्मा […]

भाई बहन के प्यार का भैयादूज पवित्र त्यौहार भाई की सुख सम्रद्धि को बहन उड़ेलती सारा दुलार टीका लगाकर माथे पर करती भाई की मंगल कामना परमात्म कृपा भाई पर रहे करती रोज़ यही साधना पवित्र रिश्ता भाई बहन का स्वार्थ के कोई स्थान नही दोनो एक दूजे के हितेशी […]

बचपन के दिन कितने है हसीन । मजा नहीं आएं दोस्तों के बिन ।। नीर में ढूंढे रेत खेलते ऐसे खेल । कभी मिट्टी आएं कभी आएं रेत ।। नीर में देख छवि भरें किलकारी । घर बनाने की कर रहें नन्हे तैयारी ।। गोपाल कौशल नागदा मध्यप्रदेश

जितने सांस दिए प्रभु ने उतना ही जीना होगा जो कष्ट लिखा है भाग्य मे वह हमको सहना होगा जो करता है सद्कर्म यहाँ उसका भाग्य उज्ज्वल होगा जिसने किये नीचकर्म उसे नरक भुगतना होगा जैसी करनी वैसी भरनी जग की है यह रीत पुरानी सदा सच की राह चले […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।