अब तो कंही रुक जाओ

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बात ये नही बहुत पुरानी,
आओ सुनायें पेड़ो की कहानी.

जंगल ,पेड़ कटे तो,
धरतीका श्रंगार उजडा,

नीरसता छाई  धरती में,
मानो वैधव्य सा हुआ मुखडा.

धरती हो गई  उदास,
छाया खत्म हुई आसपास.
सूरज के तेवर बदले,
धरती पर वो आग उगले.
सूरज की गरमी को अब कौन सोखे,
शहरीकरन को अब .कौन रोके
पानी,मिट्टी,हवा को मिले धोखे,
अब जंगलो को कटने सेकौन रोके.

बाँध बना रोका नदियों का बहाव,
बढ गया मिट्टी का कटाव.
प्रदुषीत हो गई धरती मानवीकृत से,
अशुध्द हुई आबोहवा जो मिली पुरखों व पित्र से.
अब हर मानव झेल रहा है प्रकृती का कहर,
आनेवाली पीढी को मिलरहा है प्रकृती से जहर.
छिद्र हो गये आकाशीय ओजोन पर्त में,
जलस्त्रोत खत्म  हो गये धरती के गर्त में.
अब तो कंही रुक जाओ,
समूह बनाकर आगे आओ,
कुछ सफल प्रयास कर,
धरती को प्रदूषण मुक्त कराओ.
वर्ना लोग पानी के लिये मजबूर हो जायेंगे.
वर्ना लोग पेड़ो की ठंडी छाया से दूर हो जायेंगे.
अब तो कंही रुक जाओ,
आनेवाली पीढी को कुछ तो दे जाओ,
धरती बचाने के खातिर,
नये नये पौधे उगाओ
अब तो कंही रुक जाओ,

वर्ना प्रकृती से यदि होती रही छेडछाड,
गाँव ,जंगल,नदियों को उजाड़,
उत्तराखंड सा हश्र होगा,
.बाढ, प्रलय तो कंही धसेंगे पहाड.

         अब तो कंही रुक जाओ.
अब तो कंही रुक जाओ
परिचय:

पूर्ण नाम: –  विनीता सिंह चौहान
साहित्यिक उपनाम: –
वर्तमान पता: – इंदौर pin 452009
शहर – इंदौर
राज्य – मध्यप्रदेश
कार्यक्षेत्र – इंदौर
शिक्षा – एम.एस.सी.( प्राणीशास्त्र) , बी.एड.
विधा:  कविता, गीत ,ग़ज़ल लघुकथा
सम्मान  इंदौर के कइ साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित एवं सम्मान, सिंहस्थ 2016 सम्मान , अंतरा शब्द शक्ति सम्मान, भोज शोध संस्थान में रचनायें प्रकाशित एवं सम्मान, सरोकार संस्था भोपाल द्वारा कन्या भ्रूण हत्या पर रचना प्रकाशित एवं सम्मान, विश्व व्यापी साहित्य पीडिया द्वारा बेटियां विषय पर रचना प्रकाशित एवं सम्मान,
प्रतिनिधि रचनाएं:- रुक गया है मेरा वर्तमान , बिटिया बिन अम्मां की दिवाली , अनाथ बच्चे के भाव 
अन्य उपलब्धि  :  वर्तमान में अध्यापन कार्य (व्याख्याता ) 
रूचि  :  लेखन, अध्ययन , पेंटिंग , कुकिंग
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।