राजनीति इतनी प्यारी क्यों

vindhya prakash
दुश्मन आँख दिखाया है,
सरहद तक चढ आया है ,
कितनी जाने गयी आज तक
कितना लहू बहाया है ।
हम पूछते देश चलाने वालों
राजनीति इतनी प्यारी क्यों है ।
अबतक चुप्पी धारी क्यों है ।
वार नहीं करना है तुमको
फिर तलवार निकाली क्यों है ।
वीर नहीं सह सकते ललकार
सैनिक पर बन्दिश धारी क्यों ।
कायर कबतक वार करेगा
एक वार करने  से  मरेगा
सहनशीलता बहुत हो गई ।
इतनी भी लाचारी क्यों है ।
राजनीति इतनी प्यारी क्यों है ।
तोप लडाकू विमान रहे हैं
परमाणु बम तैयार रहे हैं ।
हिम्मत केवल नहीं रही क्यों
दुश्मन में  ऐय्यारी क्यों
झूठी ये तैयारी क्यों
इतनी भी लाचारी क्यों ।
देश भक्ति सर्वोपरि रखिए
राजनीति उसपर भारी क्यों ।
सैनिक के परिवार में आशू की
एक एक बूँद का बदला ले लो
हिम्मत करके निर्णय एक तगडा ले लो
चुप्पी अबतक धारी क्यों
इतनी भी लाचारी क्यों
ना अबतक तोप निकारी क्यों
दुश्मन अबतक भारी क्यों
यह तलवार दुधारी क्यों
राजनीति इतनी प्यारी क्यों ।
कमजोर है आंख दिखाएँ
फिर हम कैसे चुप रह जाए
समय आ गया यही आज।
इनको सबक सिखाया जाए।
अबतक वार्ता जारी क्यों
दुश्मन से है यारी क्यों
आर पार हो जाए अब
राजनीति इतनी प्यारी है क्यों
इच्छा शक्ति कहाँ छिपी है
अब गर्जन नहीं सुनी है
इतनी चुप्पी धारी क्यों
मार रहा दुश्मन सीने पर
अबतक न हुंकारी क्यों
राजनीति इतनी प्यारी क्यों ।
देश भक्ति सर्वोपरि रखिए
कितनी भी हो  बाधाए
कफन बाँध कर निकले हम सब
सिंह नाद करते जाए
नहीं डरते भारत संतति
अबतक चुप्पी धारी क्यों
राजनीति इतनी प्यारी क्यों ।

            #विन्ध्य प्रकाश मिश्र विप्र

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम समाचार पत्र के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्मे तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण ने 35 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। अब तक आप 15 पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं। इसके अलावा साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान, वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान, वर्ष 2025 में लघुकथा शोध केन्द्र भोपाल द्वारा विशिष्ट हिंदी सेवा सम्मान तथा वर्ष 2026 में वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ़ एक्सीलेंस, इंग्लैंड द्वारा सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही, लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी हैं। भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की माँग को लेकर आंदोलन भी चलाया है। वर्तमान में आप देशभर में हिन्दी आन्दोलन का नेतृत्व करने के कारण हिन्दी योद्धा के रूप में पहचाने जाते हैं।