काली साडी़

Read Time2Seconds

satendra sen

तुम्हारी काली साडी़ पहनना,
मतलब एक घनी अंधेरी काली खामोशी का मेरे अन्तरमन में उतर जाना।
समा जाना मेरी सांसो कि गहराईयो में,
शायद ही एक एसा क्षण हो
जिसमें न आता हो तुम्हारा चेहरा
मेरी आंखो में,
ओर उस काली साडी़ में तो तुम
बैठ जाती हो मेरी नज़रो में
सुरमे कि तरह,
मै भी अछूता नही हूं,
बसा हूं तुम्हारी साडी़ के हर धागे में,
मेरा सर हमेशा तुम्हारे कंधे पर है
तुम्हारे पल्लू के संग,
तुम्हारे सारे बदन से लिपटा हुआ हूं
तुम्हारी साडी़ के संग संग,
तुम नही जा सकती दूर मुझसे
तुम्हारे सारे बदन को ढक दिया है मेरी
काली आंखो ने,
साडी़ के स्वरूप में,
जब जब हवा का झोंका टकराता है
तुम्हारी श्यामा साडी़ से,
तब तब मेरी आंखे मुंद जाती हैं
हवा के झोंके से,
महसूस कर लेती हैं आंखे,
साडी़ ओर पवन के स्पर्श को,
शायद मै फिर मिलूंगा,
इसी तरह,
किसी न किसी रंग में
जो घुल जायेगा मेरी आंखो से
तुम्हारी काली साडी़ में।।

  #सतेन्द्र सेन सागर

नाम -सतेन्द्र सेन सागर
साहित्यिक उप नाम- सागर
वर्तमान पता- नई दिल्ली
शिक्षा- बीबीए(मार्केटिंग) ,  बीए(शास्त्री संगीत)
कार्यक्षैत्र- अर्धसैनिक बल
विधा- मुक्तक, काव्य, दोहा, छंद
सम्मान- साहित्य सागर रचनाकार

अन्य उपलब्धिया- आखर नामक काव्य संग्रह मे रचनाए प्रकाशित, देश भर के विभिन्न राज्यो के अखवारो ओर ब्लॉग में रचनाओं का प्रकाशन।

लेखन का उद्देश्य – एक सोच को जन्म देना, प्रेम के प्रति नजरिया बदलाव एवं एक इंकलाबी लेखक बनने का प्रयाश

 

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

आत्म स्वरूप

Wed May 16 , 2018
विश्वास जगत मे पाना है सबको अपना बनाना है हर चेहरे पर हो खुशी ऐसा अपनत्व निभाना है खाने लगे आपकी कसम ऐसा आचरण अपनाना है गैर शब्द की जगह न हो प्यार ऐसा बरसाना है आत्म स्वरूप मे रहना है परमात्मा को साथी बनाना है खुद हंसना ओर हंसाना […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।