तुम निकलती क्यो नही मेरे जहन से, मै तुम्हे भूलना चाहता हूं, मै तुमसे इश्क नही, नफरतों का रिस्ता चाहता हूं। मै बहुत थक गया हूं, अब मै रोना चाहता हूं जी भर के तुमसे लिपट कर मै किसी को कुछ बताने कि स्थिति में नही रहा मै टूट रहा […]

तुम्हारी काली साडी़ पहनना, मतलब एक घनी अंधेरी काली खामोशी का मेरे अन्तरमन में उतर जाना। समा जाना मेरी सांसो कि गहराईयो में, शायद ही एक एसा क्षण हो जिसमें न आता हो तुम्हारा चेहरा मेरी आंखो में, ओर उस काली साडी़ में तो तुम बैठ जाती हो मेरी नज़रो […]

इन लकी़रो में कहीं नही है तुम्हारा नाम, फिर भी इन्तज़ार करती रहूंगी मै युगो युगो तक। तुम्हारी कविताओ में हमेशा मौजूदगी एहसास कराती रहेगी अपने साथ का, जिस्म के जल जाने के बाद वैसे तो सब खत्म हो जाता है मगर मै जिन्दा रहूंगी तुम्हारे छंदो में तुम्हारी कहानियो […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।