चला जा रहा कमाने

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aakib javed
मन में कुछ ठाने,
झोला,झंडी ताने,
कपड़े वही पुराने,
चला जा रहा कमाने!!
परिवार की तमाम ख्वाहिशो को,
जिम्मेदारियों से खुद को बांधे,
चला जा रहा कमाने!
कपड़े नही ढंग के तन में,
परेशानी हैं घर की सामने,
जाने को मन बिल्कुल ना माने,
फिर भी,
चला जा रहा कमाने!!
घर,परिवार,देश से दूर,
बीमार माँ-बाप से दूर,
प्यारे पत्नी बच्चों से दूर,
दिल बेक़रार और परेशान,
गरीबी,बेरोजगारी से हारे,
चला जा रहा कमाने!!
गरीबी में नही दिन गुजरता,
नही हैं, घर में कुछ खाने को,
चला जा रहा कमाने!!
कोई ना कोई आये दिन बीमार,
पैसे नही दवा कराने को,
जितना कमाये,उससे ज्यादा खर्च,
हो जाते खूब परेशान,
चला जा रहा कमाने!!
कुंठित,व्यथित मन में सोचे,
गर होता यंहा कुछ कमाने को,
अगर सरकार करती कोई इंतज़ाम,
होती फैक्ट्री,मिल या रोजगार,
ना जाना पड़ता घर परिवार से दूर,
यंही पर कुछ कमाते!
लेकिन अब तो हैं, मज़बूरी,
मन हो मायूस या कि हो उदास,
खातिर अपने परिवार को पालने,
चला जा रहा कमाने!!
परिचय : 
नाम-. मो.आकिब जावेद
साहित्यिक उपनाम-आकिब
वर्तमान पता-बाँदा उत्तर प्रदेश
राज्य-उत्तर प्रदेश
शहर-बाँदा
शिक्षा-BCA,MA,BTC
कार्यक्षेत्र-शिक्षक,सामाजिक कार्यकर्ता,ब्लॉगर,कवि,लेखक
विधा -कविता,श्रंगार रस,मुक्तक,ग़ज़ल,हाइकु, लघु कहानी
लेखन का उद्देश्य-समाज में अपनी बात को रचनाओं के माध्यम से रखना
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Arpan Jain

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।