नवयुग का शुभाशीष पुत्रीवती भव:

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श्रीमती माला महेंद्र सिंह, (एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी,)

गोद भराई के एक पारिवारिक कार्यक्रम में जाना हुआ। सभी बहुत उत्साहित थे, लड़के की माँ नंदिनी ने अपनी छोटी भाभी से कहा,”सुमन भाभी आओ सबसे पहले गोद आप ही भरोगी”। मेरे पास बैठी श्रीमती मिश्रा  बोली “हाँ भाई सुमन के दो-दो बेटे है, ये अधिकार तो उसी का है”। पास बैठी अन्य महिला बोली अरे बहु की गोद उसकी बुआ सास से भरानी थी। इसके पहले की वो आगे कुछ कहती, श्रीमती मिश्रा बोली “जिसके पहल पहल बेटा होता है, उससे ही गोद भरवाई जाती है।” मै मन ही मन सोच रही थी, की नन्हे मेहमान के आने की ख़ुशी में ये कौन-सा तनाव सभी वरिष्ठ महिलाये नवप्रसूता को दे रही है? कार्यक्रम चलता रहा, गाना-बजाना, लाड़-दुलार सब जारी था। इसी बीच नंदिनी भाभी ने बहू को सभी से आशीर्वाद लेने का इशारा किया। बहुरानी सभी बड़ो को यथातथा थोडा झुककर आशिर्वाद लेते जा रही थी। जैसे ही बहुरानी नंदिनी की पड़ोसी पायल जी के पास पहुंची,पायल जी ने भी सभी की तरह “पुत्रवती भव:” आशीर्वाद दिया। पायल जी की लगभग बारह वर्ष की बिटिया स्वरा तपाक से बोल पड़ी “मम्मी सब आंटी को पुत्रवती भवः ही क्यों बोल रहे है “?

मुझे भी बिटिया का प्रश्न सुनकर धक्का लगा। वह खेलने लगी और सभी अपनी हंसी ठहाकों में लग गए। किन्तु वो प्रश्न अधुरा ही रहा। जरा सोचे क्या हम हमेशा “पुत्रवती भवः” ही आशीर्वाद देंगे ? अगर हाँ तो पुत्र को जनने वाली जननी कँहा से आएगी ?

आइये नई शुरुआत करे, “पुत्रीवती भवः” का आशीष लुटाए। हो सकता है, प्रारम्भ में कुछ लोग आपको अजीब दृष्टी से देखे, आपसे बातचीत तक बन्द कर दे,आपके विषय में बाते भी बनाने लगे, आपका अपमान भी कर सकते है, लेकिन हाँ कुछ लोग आपका साथ देंगे, सम्मान भी करेंगे और वास्तव में स्त्री सम्मान की नई परिभाषा को गढ़ने के लिए अभ्युदया आपको ही मानेंगे। मै किसी भी रूप में हमारे पूर्वजो की बनाई हुई रीती से गुरेज नही रखती, लेकिन अगर कुछ बाते जिन्हें समय के साथ बदलना चाहिए, उसके लिए जरूर अपनी लेखनी आप सभी तक पहुचाऊंगी। हम सभी को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सामयिक परिवर्तन के साथ इस प्रकार के विषयो को भी समयानुकूल बदलने की जरूरत है। आइये तो आज से इस “नवयुग का शुभाआशीष पुत्रीवती भवः” को भी अपने दैनंदिन जीवन में स्थान दे।

लेखिका परिचय: श्रीमती माला महेंद्र सिंह, (एम एस सी, एम बी ए, बी जे एम सी,)

विगत एक दशक से अधिक समय से महिला सशक्तिकरण हेतु कार्यरत। जय विज्ञान पुरस्कार, स्व आशाराम भाटी छात्रवृत्ति, तेजस्विनी पुरूस्कार, गौरव सम्मान, ओजस्विनी पुरुस्कार, युवा पुरस्कार जैसे कई सम्मान प्राप्त कर चुकी है।  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय युवा उत्सव व विभिन्न राष्ट्रीय वक्त्रत्व कौशल प्रतियोगिताओ में किया। एन सी सी सिनीयर अंडर ऑफिसर रहते हुए, सामाजिक क्षेत्र में सराहनीय कार्य हेतु सम्मानित की गई। सक्रीय छात्र राजनीती के माध्यम से विद्यार्थि हित के अनेक आंदोलनों का नेतृत्व किया। अभ्यसमण्डल, अहिल्याउत्सव समिति जैसी कई संस्थाओ की सक्रिय सदस्य है। समय समय पर समसामयिक विषयो पर आपके आलेख पढ़े जा सकते है। 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।