kaji

पूजन के जो लायक है,

  मंगल और सुखदायक है ।
 शक्ति- प्रेम की मूरत वो,
    त्याग की परिचायक है ।।
 आज उसकी अस्मिता पर,
    होते वज्र प्रहार है ।
 कोमल -मासूम कलियों का ,
     दरिंदे करते रोज़ शिकार है ।।।।
  कथनी करनी का भेद यहां,
       न इज्ज़त न शाबाशी है ।
   हर वहशी की नज़रों में,
        बस हवस और अय्याशी है ।।।।।।

         #डॉ.वासीफ काजी

परिचय : इंदौर में इकबाल कालोनी में निवासरत डॉ. वासीफ पिता स्व.बदरुद्दीन काजी ने हिन्दी में स्नातकोत्तर किया है,साथ ही आपकी हिंदी काव्य एवं कहानी की वर्त्तमान सिनेमा में प्रासंगिकता विषय में शोध कार्य (पी.एच.डी.) पूर्ण किया है | और अँग्रेजी साहित्य में भी एमए किया हुआ है। आप वर्तमान में कालेज में बतौर व्याख्याता कार्यरत हैं। आप स्वतंत्र लेखन के ज़रिए निरंतर सक्रिय हैं।

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