देशभक्ति गीत

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mamata banarji
`अ` से ज्ञ` तक लेकर अक्षर,
हम सुंदर गीत लिखें।
जिसमें अपनी भारत माँ का,
रंग-रुप सुंदर दिखे।

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…।
`अ`-अलख जगाकर देशभक्ति का,
लिखें इक गीत वितान।
`आ`-आओ सारे भारतवासी,
लिखें भारत जय गान।
`इ`-इंडिया को फिर बना लें,
अपना प्यारा भारत।
`ई`-ईश्वर ने भर दी है हममें,
जीने की हर ताकत।
`उ`-उन्नतशील देश है अपना,
है आँखों का तारा।
`ऊ`-ऊँचा रहता सदा हमारा,
शान तिरंगा प्यारा।
`ए`-एकता की शक्ति से रहते,
हम भारत के भू पर।
`ऐ`-ऐसा कोई देश नहीं है,
जो हो इससे ऊपर।
`ओ`-ओंकार की मधुर ध्वनि से,
दस दिग गुंजायमान।
`औ`-औरतों को सदा देते हैं,
माँ सम मान-सम्मानll

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…।

`क`-कभी नहीं लौटाते घर से,
हम भूखे-नंगों को।
`ख`-खुद्दारी से रोटी देते,
हम नित भिखमंगों को।
`ग`-गंगा की पूजा हम करते,
गौ माता की सेवा।
`घ`-घर-घर में बाँटते खुशी से,
माखन मिश्री मेवा।
`ङ`-अड्ग वस्त्र करते हैं हम नित,
दीन-दुखियों को दानll

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…।

`च`-चहचहाते हैं संग मिलकर,
सवा अरब आबादी।
`छ`-छीन लिए अंग्रेजों से हम,
ताज तख्त आजादी।
`ज`-जयकारा कर भारत भू पर,
हम झण्डा फहराए।
`झ`-झण्डे को हम आन-बान से,
नभ पर थे लहराए।
`ञ`-कुञ्ज बन गूँजी शत बार,
पावन राष्ट्रीय गान॥

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…l

`ट`-टिकी नहीं भारत की भू पर,
दुश्मनों की बद नियत।
`ठ`-ठिठक पड़े वे देख हमारे,
भारत माँ की ताकत।
`ड`-डर कर ऐसे भागे जैसे,
डर से भागे बिल्ली।
`ढ-ढोल-नगाड़े बजे जोर से,
सज गई नई दिल्ली।
‘ण’-प्रण लिए हर भारतवासी,
देश पे देंगे जान॥

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…।

‘प’-पुण्य भूमि है प्रताप का यह,
है अशोक की धरती।
‘फ’-फौलादी ताकत भारत की,
जनता अर्जित करती।
‘ब’-बापू-शास्त्रीजी-कलाम पर,
शीश सदा हम धरते।
‘भ’-भगतसिंह की यादों में हम,
दिवस गुजारा करते।
‘म’-महावीर शाक्य मुनि हमारे,
देश के हैं दिनमान।

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…॥

‘त’- तात्या टोपे कुँवर सिंह जी,
खुदीराम औ सावरकर।
‘थ’- थर्राए थे अंग्रेजों को,
देशभक्ति के बल पर।
‘द’-देश की आजादी के लिए,
हुए कितने वीर शहीद।
‘ध’-धरती सूरज चाँद-सितारे,
गवाह हैं चश्मदीद।
‘न’-नतमस्तक है इनके आगे,
बच्चे बूढ़े जवान।

‘य’ -युद्ध नहीं है चाह हमारी,
हम शांति प्रदाता हैं।
‘र’-राम यीशु पैगम्बर नानक,
हमारे विधाता हैं।
‘ल’-लक्ष्मीबाई सरोजिनी पे,
हम जाते हैं वारी।
‘व’-वीर सुभाष राजगुरु जी के,
रोज लगाते नारा।
‘श’-शैल शिखर पर करता अपना,
भारतवर्ष अभिमान।

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा…॥

‘स’-सत्य-अहिंसा धर्म हमारा,
परोपकारी हैं हम।
‘ह’-हरीशचन्द्र की भाँति भरते,
हर पल हम अपना दम।
‘क्ष’-क्षमा करें उस शत्रु को भी,
शरणागत जो होए।
‘त्र’-त्रसित-तपित जनता को देख,
हिया हमारा रोए।
‘ज्ञ’-ज्ञान-विज्ञान के जरिए करते,
रोशन सारा जहान।

प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान,
प्यारा हिन्दुस्तान,प्यारा हिन्दुस्तान॥

#ममता बनर्जी ‘मंजरी’

परिचय : ममता बनर्जी का साहित्यिक उपनाम-मंजरी हैl आपकी जन्मतिथि-२१ मार्च १९७० तथा जन्म स्थान-इचाक (हजारीबाग-झारखण्ड) व निवास गिरिडीह(झारखण्ड) हैl स्नातक तक शिक्षित मंजरी की विधा-कविता और कहानी लेखन हैl सम्मान में आपको-साहित्य शिरोमणि,किशोरी देवी सम्मान,साहित्य गौरव एवं अपराजिता सम्मान आदि मिल चुके हैंl उपलब्धि यह है कि,आप झारखण्ड राज्य में बड़ी साहित्यिक अकादमी की अध्यक्ष हैंl आपके लेखन का उद्देश्य-समाज में जागृति पैदा करना और हिंदी भाषा को बढ़ावा देना हैl

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।