वो देवता ऐसा हुआ

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kalpana gagada

ख़्वाब बन के दिल में आया रूह  में जलवा हुआ,
हो रहा है जिन्दगी में सब मिरा सोचा हुआl

यूं भी पूरा अक्स दिखलाने के काबिल था नहींं।                                                        कल तलक जो आईना न था टूटा हुआ।

मैं फ़ज़ाओं में परिन्दे की तरह उड़ने लगी,
जिस्म कल तक था पुरानी याद से जकड़ा हुआl

तीर की मानिन्द लब से कैसे निकला एक लफ़्ज़,
फिर तो अपने-आप ही  मैं रात शर्मिन्दा हुआl

एक ने तोड़ा मुझे तो एक ने जोड़ा मुझे,
अब मिरे माज़ी का दरपन किस क़दर उजला हुआl

दिल में कितना दर्द जागा रात की तन्हाई में,
राब्ता कोई नहीं है फिर भी जाने क्या हुआl

दिल कुरदा जा रहा था मेरा माज़ी के लिए,
अनगिनत ज़ख़्मों में उभरा दर्द भी गहरा हुआl

इस मोहब्बत का सलीका मुझको बचपन में मिला,
वो मिरे किरदार की तामीर का हिस्सा हुआl

हाथ में आया जो तेरा हाथ तो ऐसा लगा,
कैसी क़ुदरत है कि अब तक था यही छूटा हुआl

`कल्पना` को दर्द से जिसने दिलाई है निजात,
मेरी नज़रों के लिए वो देवता ऐसा हुआll

                                                                     #कल्पना गागडा़
परिचय : कल्पना गागड़ा हिमाचल राज्य के शिमला में रहती हैं। पेशे से आप सरकारी शिक्षा संचालनालय में अधीक्षक(वर्ग २)हैं। लिखने की वजह शौक है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।