
Next Post
मुरली की तान
Tue Dec 26 , 2017
मुरली,माखन,प्रीति है,कृपा मिले अभिराम। ब्रजवासी फिर मुक्ति क्यों,चाहेगा घनश्याम!॥ जड़-चेतन,चर-अचर सब,मोहे खोकर ध्यान। हुई अचेतन सृष्टि सब,सुन मुरली की तान॥ भागीं मधुवन के लिए,बूढ़ी,बाल-जवान। हुईं गोपियाँ बावलीं,सुन मुरली की तान॥ झूमें,नाचे चर-अचर,भूल देश,गति,काल। कान्हा की बंशी बुने,सम्मोहन का जाल॥ […]

पसंदीदा साहित्य
-
July 8, 2017
‘मॉम’ लाजवाब(समीक्षा)
-
December 14, 2018
बिटिया का घर
-
March 30, 2020
कोरोना की जंग में हम लापरवाह क्यों?
-
October 15, 2022
राधेश्याम माहेश्वरी भाषा सारथी सम्मान से सम्मानित
