क्रोएशिया में मनाया `हिंदी दिवस`

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शैक्षणिक सत्र अक्टूबर से प्रारंभ होने के कारण भारतीय दूतावास के सौजन्य से इंडोलॉजी विभाग द्वारा हिंदी दिवस कार्यक्रम १७ नवंबर को संपन्न हुआ। शुभारंभ माँ सरस्वती को संदीप कुमार(भारतीय राजदूत),प्रो.व्लाहोविच स्तेतिच(अधिष्ठाता मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान),डॉ. इवान आंद्रियानिच(अध्यक्ष भारत विद्या विभाग)आदि के दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
कु. मारिया षिमग ने `वर दे!वीणावादिनी` वंदना प्रस्तुत की। अतिथि आचार्य(हिंदी)प्रो. रवींद्रनाथ मिश्र ने सभी गणमान्य अतिथियों, भारतीय दूतावास के अधिकारियों, हिंदीप्रेमियों, छात्र-छात्राओं आदि का अभिनंदन किया। कु.वेलेंटीना एवं लावरा ने हिंदी और क्रोएशियन भाषा में कार्यक्रम का संचालन करते हुए सबसे पहले प्रो.व्लाहोविच स्तेतिच को आर्शीवचन के लिए आमंत्रित किया। प्रो.व्लाहोविच ने `हिंदी दिवस` के प्रति अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करते हुए भारत विद्या विभाग को प्रोत्साहित किया। तत्पश्चात संदीप कुमार ने क्रोएशिया के अन्य विश्वविद्यालयों के साथ तालमेल करने की सलाह दी। यहां हिंदी की भांति संस्कृत पीठ की स्थापना,भारत एवं क्रोएशिया के बीच पारस्परिक सांस्कृतिक संबंधों,विद्यार्थियों की संख्या वृद्धि आदि महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रकाश डाला। डॉ. इवान ने हिंदी दिवस के प्रति प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भारतीय दूतावास को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही विभाग में संस्कृत और हिंदी के अध्ययन-अध्यापन की प्राचीन परंपरा का उल्लेख किया। हिंदी की सर्वव्यापकता पर प्रकाश डालते हुए विभाग में उसकी अनिवार्यता बल दिया।
मुख्य वक्ता प्रो.रवींद्रनाथ मिश्र ने महान संत तुकाराम की `शब्द ही एकमात्र रत्न है,जो मेरे पास है`..पंक्तियों से शब्द की महत्ता को रेखांकित करते हुए हिंदी को भारतीय संस्कृति की आत्मा एवं राष्ट्र की अस्मिता से जोड़कर उसके महत्व को प्रतिपादित किया। प्रो. मिश्र ने अपने बीस महीनों के अनुभवों के आधार पर भारतीय एवं क्रोएशियन भाषा और संस्कृति के सामीप्य के संदर्भ में मामा,टाटा,ग्राबीती,जनाति,माती,द्वा,त्रि,षेस्त आदि क्रोएशियन शब्दों को संस्कृत और हिंदी के बहुत करीब बताया। हिंदी के अतीत की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रो. मिश्र ने कहा कि वह किस प्रकार आज हिंग्लिश,लिपि एवं बोली के संघर्षों से जूझती हुई अपनी शब्द संपदा,गुणवत्ता,अर्थवत्ता आदि गुणों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रगति का परचम फहरा रही है। उन्होंने वैश्विक धरातल पर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया,हिंदी पीठों,भारतीय दूतावासों,विश्व हिंदी सचिवालय,भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय आदि की भूमिका की सराहना की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ बॉब दिलान के सुप्रसिद्ध `हे मर तम्बौरिने मैन` गीत के संस्कृत अनुवाद के सामूहिक गायन से हुआ। कुमारी पावला ने क्रोएशियन से हिंदी में अनुदित स्वरचित `रास्ते में` तथा दोरोतेया ने `पुष्प की अभिलाषा` कविताओं का वाचन किया।
इस अवसर पर प्रो. मिश्र द्वारा निर्देशित नाटक `भारतीय दूतावास` का मंचन कु.मिया स्तुबिचर,दोरोतेया और पेत्रा शेरबेतार द्वारा किया गया। तृतीय-पंचम वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा हिंदी कविता-कहानी लेखन सारणी की प्रदर्शनी भी लगाई गई। समारोह में विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक क्रेसीमिर कर्निक,विश्या ग्राबोवाक,कटरीना,भारतीय संस्कृति केंद्र ज़ाग्रेब की संयोजिका मारियाना यान्यिच तथा भारतीय दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी श्री-श्रीमती जे.एन. मांझी सहित श्रीमती हरीशकुमार नरूला,श्रीमती हर्ष बावेजा और छात्र-छात्रा भी उपस्थित थे।
(आभार-वैश्विक हिंदी सम्मेलन,मुंबई)

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।