डंका चुनाव का

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sakshi

बज गया डंका चुनाव का,
लो फिर हुई यह रेस शुरु।
मैं सच्चा कि-तू झूठा,
की चल पड़ी है होड़ शुरु।
कोई घुमराए मज़हब से,
कोई रिझाए नोटों से,
कोई डराता ताक़त से,
कोई लुभाए बड़े नामों से।

जनता की तकलीफों को,
अभी तो सब अपना बतलाते हैं,
जनता चाहे जाए चूल्हे में
जब वोट इन्हें मिल जाते हैं।
कोई करे जात की राजनीति,
कोई फुसलाए गठजोड़ से,
कोई दिखाए सपने सलोने,
किसानों को आशा के खिलौने।
बाँट रहे साइकलें-लैपटॉप,
वक़्त आने दो एक दिन,
छीन के ले न जाए सब,
देख रह जाओगे चुपचाप।
जनता बोली,फिर ठगने को,
आ खड़े हुए मैदान में,
इनको है कितना भरोसा,
हमारा सब्र परखने को।

#साक्षी पेम्मरजु ‘स्वप्नाकशी’

परिचय : बैंगलोर में निवास कर रही साक्षी पेम्मरजु ‘स्वप्नाकशी’ का इंदौर से भी नाता है,क्योंकि मध्यप्रदेश के झाबुआ से इन्होंने अपनी पढ़ाई की है। बचपन से हिन्दी में कविताएँ लिखने का इनका शौक अब तो जुनून है,जो स्वप्नाकशी नाम से देखने में आता है। फिलहाल यह सॉफ़्टवेयर इंजीनियर के रुप में कार्यरत हैं।

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matruadmin

2 thoughts on “डंका चुनाव का

  1. Wow that’s very nice .. keep it up.. God bless you.. ” डंका चुनाव का “

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संस्कार

Sat Feb 11 , 2017
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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।