कुदरत के साथ…

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krishnkumar nirav
अर्ज करता हूं मैं तुमसे बारहा इज्जत के साथ,
तुम नहीं बर्दाश्त मुझको अब किसी कीमत के साथ।
रहनुमाई ने तुम्हारी गर्क में पहुंचा दिया,
आज कहना पड़ रहा है बहुत ही गैरत के साथ।
कूदकर कॉलर पकड़ लेने को बेबस मत करो,
बेइज्जत भी जानता हूं खूब,मैं स्वागत के साथ।
मात कर सकता है चूहा, चुटकियों में शेर को,
बस यही कि, किच-किचाकर ठान ले हिम्मत के साथ।
मौत पर बन जाएगी यदि संतुलन गड़बड़ हुआ,
हद से ज्यादा छेड़खानी मत करो कुदरत के साथ।
जिंदगी में वह कहीं भी फेल हो सकता नहीं,
काम करता जो हमेशा लगन व मेहनत के साथ।
आदमी,खाते में अरबों रुपए रख ले भले,
कुछ नहीं जाता है ‘नीरव’ अंत में मय्यत के साथ॥
                                                     #डॉ.कृष्ण कुमार तिवारी ‘नीरव’
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।