बचपन खो गया

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naveen tiwari
बचपन की टोकरी,
          निश्चल प्रेम सोचती।
                दोपहर सारी मस्ती,
                     बचपन खो गया॥
उपवन भरे पुष्प,
        फल तोड़ खाए भूल।
             वानरों पे फेंक धूल,
                   बचपन खो गया॥
उछलकूद से बस्ती,
         हलाकान पर मस्ती।
              शोर गुल किए हस्ती,
                     बचपन खो गया॥
बालक-बालिका साथ,
        जाति धर्म कहाँ बात।
               खान-पान डरे रात,
                     बचपन खो गया॥
                                                                #नवीन कुमार तिवारी ‘अथर्व’ 
परिचय: नवीन कुमार तिवारी ‘अथर्व’ की जन्म तिथि ४ मार्च १९५९ है। शिक्षा  बी.काम. है। आप काव्य लेखन में मुक्तक,व्यंग्य लेखन आदि लिखते हैं। ब्लॉग पर भी सक्रिय हैं। छत्तीसगढ़ के जिले दुर्ग में नेहरु नगर( पूर्व भिलाई नगर)में आपका निवास है। 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।