लौटा हुआ अतीत

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madhudeep

हाँ अनवर ! मैं इस धार्मिक किताब पर हाथ रखकर पूरे होशो-हवाश में यह स्वीकार करती हूँ कि उस समय तुम्हारे प्यार की गिरफ्त में फँसकर और अपनी माँ से विद्रोह करके तुमसे निकाह करना मेरे जीवन की सबसे बड़ी भूल थी |

हाँ माँ ! आज मैं भरे मन से यह स्वीकार करती हूँ कि तुम एकदम सही थीं और मैं बिलकुल गलत | बाप का साया मेरे सिर से उठ जाने के बाद तुम मेरे लिए माँ-बाप दोनों बन गई थीं | और मैं…मैंने किस बेहयाई से यह कह दिया था कि मैं अब बालिग हो गई हूँ और अब मेरी जिन्दगी पर तुम्हारा कोई हक नहीं है | हाँ माँ ! उस समय अनवर के प्यार का जादू मेरे सिर चढ़कर बोल रहा था |

हाँ अनवर ! तुमने निकाह के दो साल के अन्दर ही किस रुखाई से तलाक…तलाक…तलाक कहकर सब-कुछ खत्म कर दिया था क्योंकि तुम्हारी जिन्दगी में मुझसे हसीन औरत सायरा जो आ गई थी |

हाँ माँ ! मैं जानती हूँ कि उस समय भी तुम मुझे माफ करके गले लगा लेतीं लेकिन इसमें भी तो मेरी गैरत आड़े आ गई थी |

यह बीस साल पहले की बात है जब मैं तलाकशुदा शाहीन से दोबारा शान्ति बनकर सड़क पर बेसहारा खड़ी थी | उस समय मैं टूटी हुई जरूर थी लेकिन मैं पूरी हिम्मत से गोद की बच्ची को प्रगति नाम देकर बड़ा करने में जुट गई थी |

हाँ माँ ! आज बीस साल बाद मैं तुमसे फिर से मुखातिब हूँ | प्रगति अब मुझसे दो इंच लम्बी होकर जावेद से निकाह करने के लिए ढिठाई से मेरे सामने ठीक उसी तरह खड़ी है जैसे मैं उस समय तुम्हारे सामने खड़ी थी | आज उसने भी मुझसे कह दिया है कि अब वह बालिग हो चुकी है और मेरा उस पर कोई हक नहीं है | मैं तुम्हारी ही तरह हैरान और परेशान हूँ माँ !

मैं बेबस हूँ प्रभु ! मैं तुम्हारे सामने हाथ जोड़कर भीख माँगती हूँ, मेरे किये गुनाह की सजा मेरी प्रगति को न दे | उसे बचा ले प्रभु !

#मधुदीप

   जन्मस्थान    : दुजाना (हरियाणा)

        शिक्षा    : स्नातक (कला)

प्रकाशित कृतियाँ   : एक यात्रा अन्तहीन, उजाले की ओर, और भोर भई, पराभव, लौटने तक, कल की

                  बात, It Was Yesterday (उपन्यास)

                   छोटा होता आदमी (कहानी-संग्रह)

                   मेरी बात तेरी बात, समय का पहिया… (लघुकथा-संग्रह)

                   66 Laghukathas by Madhudeep

                   हिस्से का दूध (लघुकथा तथा कहानी-संग्रह)

                   तनी हुई मुट्ठियाँ, पड़ाव और पड़ताल, नई सदी की धमक (सम्पादित लघुकथा-                          संकलन  

                   तीसरा महायुद्ध, आसार, एक कदम और (सम्पादित कहानी-संग्रह)

                   ऐसे बनो बहादुर (बाल उपन्यास)

     विशेष    :     उपन्यासों पर लघु शोध प्रबन्ध अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा स्वीकृत, वर्तमान में

लघुकथा शृंखला ‘पड़ाव और पड़ताल’ के खण्डों के सम्पादन/संयोजन में

संलग्न, अब तक 27 खण्ड प्रकाशित

सम्प्रति   :    निदेशक, दिशा प्रकाशन

सम्पर्क   :   दिल्ली

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।