वंश-वृद्धि

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mahesh shandilya
हमें तो बस
वंश वृद्धि के लिए,
एक बेटा चाहिए।
विवाह के अवसर पर,
अच्छे-खासे
दहेज के लिए,
बिटिया नहीं,
हमें तो बस बेटा चाहिए।
उसकी शादी में,
बहू के माता-पिता से,
नकद रकम,
और
घर-बंगला,कार चाहिए.
हमें तो बस बेटा चाहिए।
हे मनुज,
जरा विचार कर,
बहू आने पर,जो बेटा,
माता-पिता को
भेज देता वृद्धाश्रम,
उसके लिए,
सारी सुख-सुविधाएँ चाहिए
हमें तो बस बेटा चाहिए।
और
वो किसी की है बिटिया,
तो किसी की बहिन है,
तो है, किसी की स्त्री.
वही है, हम सबकी माँ
यह भी तो जान लीजिए,
बस हमें तो बेटा चाहिए।
एक माँ, एक जननी को,
भविष्य में किसी की,
माँ बनने वाली,
बिटिया ही नहीं चाहिए,
हमें तो बस एक बेटा चाहिए।
एक
बिटिया के लिए,
उसके माता-पिता,
सास-ससुर, पति ही है,
उसका सबसे बड़ा धन
बस उसे और कुछ नहीं चाहिए.
फिर भी हमें एक बेटा चाहिए.
हे
श्रेष्ठ जन, हे नर,
हे मनुज, हे परम,
जरा विचार कर,
जो है, जगत-जननी,
वो हमें नहीं चाहिए।
हमें तो बस,
वंश-वृद्धि के लिए,
एक बेटा चाहिए।
सृष्टि के
सृजन का नाम है,
हमारा समाज,
हमारी संस्कृति,
इसीलिए हमें,
बिटिया और बेटा,
माता-पिता दोनों ही चाहिए॥
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।