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सुभाष-सा होना था...
Wed Aug 23 , 2017
मनहरण घनाक्षरी…… उस नेता को भुला के नेता सभी कहते हैं, कैसे याद करुं उसे,हमें भी तो सोना था। भारती करे विलाप, शहीदों की लाश पर, मंत्रियों की लाश बिछे, उस पे क्या रोना था॥ सोई जनता के स्वाभिमान को जगाता गया, देशभक्त एक-एक सुभाष-सा होना था। युद्ध अपराधी जिसे […]

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