दूसरा प्रयास

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swarakshi

साथ तेरे मैं कैसे रहूंगी सदा,
प्रीत में उलझनें तो बहुत देखी हैं,

कैसे बरखा करूँ जुल्फ की छाँव की..
तोड़ दूँ बेड़ियां  किस तरह पाँव  की,
बात करते हो मधुवन की तुम तो सदा..
मैंने आँखों के सावन बहुत देखे हैं।

साथ,कैसे बन्द प्रीत की खिड़कियाँ खोल दूँ,

तुझपे  कर लूँ यकीं

और  हाँ  बोल दूँ,
गोरे  गालों पे लिखने  दूँ  कैसे  ग़ज़ल..
दिल के टूटे से दर्पण बहुत देखे हैं..

साथ…।

तुम हो बादल आवारा,ओ मेरे सनम,

तोड़ जाओगे एक पल में सारी कसम..
भूल जाओगे परदेस जा के मुझे,
पंछी परदेशी प्रीतम बहुत देखे हैं।

साथ,हाँ ये सच है तेरी बन्दगी मैं करुं,

तेरे नामों की माला भी जपती रहूँ..
पर कैसे समर्पित करुं ये दिन,
वासना के निर्वासन बहुत देखे हैं..
साथ…।

तुझसे ऐसे मिलन करना चाहे स्वरा,
नदियाँ सागर से,बादल से मिलती धरा..
मांग सिंदूर भर के,बना लो दुल्हन,
तन्हा साँसों के बिखरन बहुत देखे हैं..
साथ…॥

                                                                                         #स्वराक्षी स्वरा

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।