केन्द्रीय गृहमंत्री को सुनाई हिन्दी प्रेमियों ने गुहार

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14 जुलाई की सुबह केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से उनके आवास पर प्रख्यात पत्रकार राहुल देव,विदुषी कथाकार चित्रा मुद्गल,पद्मश्री डाॅ.श्यामसिंह शशि,मुंबई विश्वविद्यालय के प्रो. करुणाशंकर उपाध्याय,संपादक राकेश पाण्डेय तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के डाॅ. दर्शन पाण्डेय ने भी भेंट कीl सभी ने भोजपुरी और राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल होने से हिन्दी को होने वाली क्षति के बारे में गृहमंत्री को विस्तार से बताया और यह भी बताया कि हिन्दीभाषी क्षेत्र की जनता द्विभाषिक होती है। हम घरों में भोजपुरी,अवधी,ब्रजी आदि बोलते हैं और लिखने- पढ़ने का सारा काम हिन्दी में करते हैं। यहां के लोगों की बुनियादी शिक्षा हिन्दी में होती है,इसलिए हमें भोजपुरी भाषी,राजस्थानी भाषी आदि कहना न्यायसंगत नहीं है। उनसे आग्रह किया कि,वे हिन्दी की किसी भी बोली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल न करें और इस विषय में यथास्थिति बनाए रखें। गृहमंत्री ने लगभग आधे घंटे तक बातें पूरे मनोयोग से सुनी और पूरे मामले पर विचार की बात कही है। साथ ही केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू के निर्देश पर संयुक्त सचिव (केन्द्रीय गृह मंत्रालय)शशांक शेखर ने भी हिन्दी प्रेमियों की बात सुनी है।
इसमें पूर्वोक्त साथी सदस्यों के अलावा केन्द्रीय हिन्दी समिति के सदस्य प्रो. कृष्णकुमार गोस्वामी,प्रख्यात लेखक तथा पूर्व संयुक्त सचिव(रेल मंत्रालय) प्रेमपाल शर्मा,प्रख्यात भाषा चिंतक महेशचंद्र गुप्त और संपादक महेशचंद्र शर्मा भी उपस्थित थे। संयुक्त सचिव ने पूरी रिपोर्ट गृह राज्य मंत्री को देने का आश्वासन दिया है। 2950 प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा हस्ताक्षर किए गए प्रपत्र तथा हिन्दी बचाओ मंच की विगत आठ माह की गतिविधियों की रिपोर्ट भी उन्हें सौंपी  गई है। इसके अलावा  संसदीय राजभाषा समिति के उपाध्यक्ष सत्यनारायण जटिया से भी उनके आवास पर मुलाकात हुई और उनके सहयोग का आश्वासन मिला है।

(आभार-वैश्विक हिन्दी सम्मेलन,मुंबई)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।