दिल सारे तमाशे तुझे….

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emran

लोगों के सभी फ़लसफ़े झुठला तो गए हम,
दिल जैसे भी समझा,चलो समझा तो गए हम।

मायूस भला क्यों हैं ये दुनिया के मनाज़िर,

अब आँखों में बीनाई लिए आ तो गए हम।

किस बात पे रूठे दरो दीवार मकाँ हैं,
कुछ देर से आए हैं,मगर आ तो गए हम।

खुद राख हुए सुब्ह तलक सच है ये,लेकिन,
ऐ रात!तिरे जिस्म को पिघला तो गए हम।

रोए,हंसे,उजड़े,बसे,बिछड़े भी मिले भी,
दिल सारे तमाशे तुझे दिखला तो गए हम।

क्यों हाशिए पर आज भी रखती है कहानी,
किरदार निभाने का हुनर पा तो गए हम।

अब बढ़ के ज़रा ढूंढ लें,मंज़िल के निशाँ भी,
उकताए हुए रास्ते बहला तो गए हम।

साबुन की तरह ख़ुद को गलाना पड़ा बेशक,
पर लफ़्ज़े-मुहब्बत! तुझे चमका तो गए हम।

 #इमरान बदायूंनी

परिचय : इमरान बदायूंनी को ग़ज़लें लिखने का शौक है। आपकी आयु २६ वर्ष है,तथा जन्म स्थान ग्राम-कलौरा (जिला-बदायूं,उत्तरप्रदेश)है। वर्तमान में हरिद्वार में रह रहे हैं। अभियांत्रिकी में स्नातक की शिक्षा प्राप्त इमरान बदायूंनी भेल में सहायक अभियंत्री  हैं। 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।