किसानों की ऋण माफ़ी

2
0 0
Read Time5 Minute, 46 Second
baldva
सातारा जिले के कर्ज लेने वाले गरीब किसानों को देखिए,बस इनको आत्महत्या नहीं करनी है। हाँ,इनके कारण असली किसान आत्महत्या जरूर कर रहे,वैसे भी कर्ज एक बार माफ़ किया जाता है, गलती भी एक बार माफ़ की जाती है,दूसरी बार गलती नहीं,अपराध होता है। इसी प्रकार एक बार कर्ज माफ़ पूरे जीवन में ठीक है,किंतु बार-बार कर्ज माफ यानि ……???
ये आदत भी दगाबाज  नेताओं और अधिकारियों की देन है। एक मत की खातिर तो दूसरा नोट की खातिर ये सब करवाता है,जबकि असली किसान तो या नशे में गिरा पड़ा है,या अपनी खेती में व्यस्त है। उसकी दिलचस्पी बसों को जलाने में नहीं है,बसें  जलाना,दंगे करना और करवाना सिर्फ नेताओं, अधिकारियों और नकली किसानों का काम है। ये ही उनकी रोज़ी,रोटी और कमाई का जरिया है। ऐसे कुछ महान किसानों पर नज़र डालकर सोचिए जरुर-प्रभाकर घारगे( ९२लाख),अनिल देसाई(८५लाख),आ.मरंद पाटील(७२ लाख),
संजीवराजे निंबाळकर (६७ लाख),शिवांजली राजे(४८लाख) सहित कई किसान हैंजिनमें से कई ऋणधारक,अत्यंत सामान्य और गरीब पार्टी  राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक हैं। अब समझ में आया कि,कर्ज माफी क्यों चाहिए इन गरीब किसानों को…धन्य है भारत। क्या अब जनता मिलकर इनका घर-बार जो इस तरह बनाया है उसकी बुनियाद जलाएगी!!ताकि ऐसा बार-बार न हो। किसी माफी का तब ही कुछ मतलब निकलेगा,जब
नींव पर सुधार होगा।
असली समस्या किसानों  की नहीं है,क्योंकि उनको कुछ मिलता ही नहीं है,बस बजट में प्रावधान होता है,और चोर,नेता तथा अधिकारी मिलकर किसान के नाम पर पैसा खा जाते हैं। किसानों के जो ऋण हैं वो लाखों में,किन्तु नकली किसानों  के नाम पर जो है वो करोड़ों हैं। ये नेता और अधिकारी हैं,वर्ना ग्राम सेवक जो कुछ हज़ार तनख्वाह पाता है,बड़ी कारों और बंगलों का मालिक नहीं होता। दरअसल नेताओं और अधिकारियों ने जो असल किसान हैं,उनको नशों में झोंक दिया है,और एक रुपए के अनाज में ऐसा फँसा दिया है कि,वो किसानी ही भूल गया है,या कहें कि और गर्त में जा रहा है। आज ज़रूरत है कि,जनता और ईमानदार नेतागण ग्रामों में समितियां बनाएँ,जिसमें पढ़े-लिखे किसान हों और जो मूल रुप से खेती या जैविक खेती करते हों। इन ग्राम समितियों को बनाकर उनके द्वारा ग्रामीण युवक -युवतियों को संस्कारवान और बलशाली बनाया जाए,ग्रामवासियों को  व्यसन मुक्त बनाया जाए,सभी के लिए पढ़ाई की उचित व्यवस्था,वर्षा जल संरक्षण,पर्यावरण को सही करना,कम-से- कम अपने परिवार के लिए जैविक खेती करने  आदि का कार्य किया जाए। मेरा मानना है कि,किसानों को कुछ योजनाओं का लाभ देना है,तो जो खेती कर रहे हैं, उनको ही दो,न कि कागजी किसानों को। वैसे ये कटु सत्य है कि, किसानों की योजनाओं का लाभ असली खेती करने वाले को मिलता ही नहीं है,क्योंकि वो न तो ग्राम सेवक के चक्कर  लगा सकता है,न ही ग्राम सेवक खुद भी चाहता है। बस नाम हो जाए और सारी राशि खुद अधिकारियों के साथ मिलकर खा जाए ,तो  बेईमान नेताओं और मंत्रियों को भी कुछ टुकड़े डालकर ……….???
आज देश को खेती के साथ अच्छे नेताओं व अधिकारियों की सख्त आवश्यकता है। जिस दिन ऐसे नेता और अधिकारी देश को मिल जाएंगे,उस दिन से ही अच्छे दिन आएँगे।

                                                                           #शिवरतन बल्दवा

परिचय : जैविक खेती कॊ अपनाकर सत्संग कॊ जीवन का आधार मानने वाले शिवरतन बल्दवा जैविक किसान हैं, तो पत्रकारिता भी इनका शौक है। मध्यप्रदेश की औधोगिक राजधानी इंदौर में ही रिंग रोड के करीब तीन इमली में आपका निवास है। आप कॉलेज टाइम से लेखन में अग्रणी हैं और कॉलेज में वाद-विवाद स्पर्धाओं में शामिल होकर नाट्य अभिनय में भी हाथ आजमाया है। सामाजिक स्तर पर भी नाट्य इत्यादि में सर्टिफिकेट व इनाम प्राप्त किए हैं। लेखन कार्य के साथ ही जैविक खेती में इनकी विशेष रूचि है। घूमने के विशेष शौकीन श्री बल्दवा अब तक पूरा भारत भ्रमण कर चुके हैं तो सारे धाम ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी कई बार कर चुके हैं।

matruadmin

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

2 thoughts on “किसानों की ऋण माफ़ी

  1. नमस्ते,

    आपकी पसंद के त्वरित और टिकाऊ ऋण के लिए $ 500 मिलियन से अधिक नहीं है, अपने आवेदन को (martinlaurafinancefirm@gmail.com) के माध्यम से मुक्त करने के लिए स्वतंत्र महसूस करें हम आपका सपना सच करते हैं !!!

    धन्यवाद!!!

  2. नमस्ते,

    यदि आप किसी भी तरह की वित्तीय कठिनाइयों में हैं, तो मार्टिन लाउरा फाइनेंस एफआईआरएम वर्तमान में $ 5,000 से आपकी स्थिति के बावजूद आपकी वित्तीय बाधाओं को पूरा करने के लिए किसी भी तरह के ऋण प्रदान करता है। 2% की सस्ती दर पर $ 500,000,000.00 तक, संपार्श्विक मुक्त, बुरा क्रेडिट स्वीकार किया गया। ऋण राशि पर विचार विमर्श योग्य है, विश्वसनीयता सेवाएं हम प्रस्तुत करते हैं। हमारे साथ पसंद के किसी भी ऋण के लिए आवेदन करें, कृपया केवल सक्षम (martinlaurafinancefirm@gmail.com) के माध्यम से सक्षम आवेदन करें।

    सादर!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

....तो चलते क्यूँ हो

Sat Jun 17 , 2017
यूँ बिना ख्वाब के तुम घर से निकलते क्यूँ हो। पाँव के छालों से डरते हो तो चलते क्यूँ हो॥ अच्छे खासे हो मियां थोड़ी तो मेहनत कर लो। यूँ जवानी में भरी बैठ के ढलते क्यूँ हो॥ धूप में रहना है तो खुद को यूँ पत्थर कर लो। बन […]

नया नया

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, ख़बर हलचल न्यूज़, मातृभाषा डॉट कॉम व साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। साथ ही लगभग दो दशकों से हिन्दी पत्रकारिता में सक्रिय डॉ. जैन के नेतृत्व में पत्रकारिता के उन्नयन के लिए भी कई अभियान चलाए गए। आप 29 अप्रैल को जन्में तथा कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। डॉ. अर्पण जैन ने 30 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण आपको विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2020 के अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से डॉ. अर्पण जैन पुरस्कृत हुए हैं। साथ ही, आपको वर्ष 2023 में जम्मू कश्मीर साहित्य एवं कला अकादमी व वादीज़ हिन्दी शिक्षा समिति ने अक्षर सम्मान व वर्ष 2024 में प्रभासाक्षी द्वारा हिन्दी सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं, साथ ही लगातार समाज सेवा कार्यों में भी सक्रिय सहभागिता रखते हैं। कई दैनिक, साप्ताहिक समाचार पत्रों व न्यूज़ चैनल में आपने सेवाएँ दी है। साथ ही, भारतभर में आपने हज़ारों पत्रकारों को संगठित कर पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर आंदोलन भी चलाया है।