सांस्कृतिक मूल्य

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गर्व करें हम मूल्यों पर अपने,
नमन करें हम मूल्यों को अपने।
मानव धर्म का ज्ञान कराएं,
मूल्य हमें इंसान बनाएं।

नैतिकता का पाठ पढ़ाएं,
मूल्य हमें सन्मार्ग दिखाएं।
भौतिक विकास का सोपान चढ़ाएं,
दिल में हमारे आध्यात्म जगाएं।

व्यक्तित्व हमारा सुंदर बनाएं,
मूल्य हमें संस्कारी बनाएं।
ईर्ष्या द्वेष से हमको बचाकर,
श्रृद्धा विश्वास मन में जगाएं।

जाति धर्म से परे ले जाकर,
राष्ट्रीय एकता का भाव जगाएं,
सामाजिक सांस्कृतिक मूल्य हमारे,
भारत को विश्व गुरु बनाएं।

भारतीय मूल्यों को हम अपनाएं,
ये विरासत बच्चों को भी दे जाएं।
आओ हम सब ये संकल्प उठाएं,
भविष्य देश का उज्ज्वल बनाएं।

नवनीत कुमार शुक्ल
रायबरेली (उ० प्र०)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।