बॉलीवुड की नयी थाली नीति

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बॉलीवुड विश्वविद्यालय का वेबिनार आयोजित था। विश्वविद्यालय के कुलपति और
सभी विभागाध्यक्ष बॉलीवुड की नयी शिक्षा नीति से लेकर थाली नीति पर अपने
विचार व्यक्त कर रहे थे। वेबिनार में वे बतला रहे थे कि अब विश्वविद्यालय
में थाली नीति को भी शामिल कर लिया गया है। थाली नीति के आने से यहां
पढ़ने-वाले सभी अभिनेता-अभिनेत्रियों के व्यक्तित्व विकास में काफी हद तक
मदद मिलेगी। नवागंतुक अभिनेत्रियों को पता चलेगा कि यहां एक थाली प्राप्त
करने के लिए अब पापड़ नहीं बेलने पड़ते बल्कि थाली में छेद करना सीखना होता
है। इसी बीच विश्वविद्यालय के कुलपति ने वेबिनार में एक छेद वाली थाली
दिखा दी और कहा कि बॉलीवुड के लोग जिस थाली में खाते हैं उसमें छेद कर
देते हैं। इस थाली में जितने अभिनेता-अभिनेत्रियों ने खाये सभी ने छेद कर
दिये। इसलिए यह एक ऐतिहासिक थाली है। इसे दिखा नवागंतुक
अभिनेता-अभिनेत्रियों को शिक्षा दी जायेगी कि थाली में किस तरह छेद किया
जाता है।
विश्वविद्यालय के अपराध विभाग के अध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त करते हुए
कहा कि अब तक बॉलीवुड के लोग फिल्मों में तस्करी करना, ड्रग्स लेना,
सिगरेट पीना, दारू पीना, लव मैरिज करना, लड़की छेड़ने आदि की शिक्षा देश को
दे चुके हैं। लेकिन अब वे इस कोर्स के लागू हो जाने से थाली में छेद करने
का भी संदेश फिल्मों के माध्यम से देंगे। वैसे देश की थाली में छेद करके
दाउद इब्राहिम, विजय माल्या, नीरव मोदी आदि विदेश फरार हो चुके हैं।
विभागाध्यक्ष ने यह भी बताया कि बॉलीवुड में इससे पूर्व शादीशुदा
अभिनेता के द्वारा दूसरी शादी करना, पत्नी को तलाक देकर बुढ़ापे में भी
बेटी की उम्र की अभिनेत्रियों के साथ शादी करना आदि का संदेश दिया जा
चुका है। देश की महिलाएं गर्भवती होने पर अपना गर्भ साड़ी के पल्लू से
छिपाये फिरती हैं लेकिन बॉलीवुड की शादीशुदा अभिनेत्रियां जींस पहनकर
अपने बम्ब को ऐसी दिखाती हैं मानों उनके पेट में खरबूजा की नयी वेराइटी
उग रही हो। उस बम्ब को मीडिया के लोग चासनी लगाकर दर्शकों के समक्ष ऐसे
परोसते हैं जैसे होटलों में बीयर परोसा जाता है।
वेबिनार में विचार व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के लव विभाग के अध्यक्ष
ने कहा कि देश के लोगों को पहले प्यार करना नहीं आता था। लोगों को लव
करना बॉलीवुड के लोगों ने ही सिखाया। इसीलिए तो उन्होंने गीत भी लिखा
प्यार किया नहीं जाता हो जाता है। जब उनका मन प्यार से उब गया तो
उन्होंने देश के लोगों को नया संदेश दिया-चोली के नीचे क्या है, चोली के
नीचे, चोली में दिल है मेरा दिल मैं दूंगी अपने यार को। अब सवाल उठता है
कि उन्होंने चोली के दिल को अपने यार को कितने हद तक दिया ये तो वे ही
जाने लेकिन उन्होंने बताया कि अब चोली से ज्यादा बॉलीवुड में थाली का
महत्व है। थाली पाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। अब तो बॉलीवुड
के लोगों का दिल थाली में ही बसता है।

नवेन्दु उन्मेष
रांची (झारखंड)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।