भारत-भारती से सम्मानित हुए रुपेश

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बिहार के सिवान जिले के चैनपुर गाँव के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे व भौतिक विज्ञान के छात्र रूपेश कुमार, पुत्र- श्री भीष्म प्रसाद, को “राष्ट्रिय आंचलिक साहित्य संस्थान”, हरियाणा द्वारा निस्वार्थ साहित्य सेवा के लिये पूरे भारत से पाँच साहित्यकारो मे जिनमें रुपेश कुमार को भी “भारत भारती” सम्मान से नवाजा गया ! विश्व जनचेतना ट्रस्ट, बिसलपुर, बरेली, उत्तरप्रदेश द्वारा हिंदी दिवस पर “हिंदी गौरव सम्मान” ऑनलाइन सम्मानित किया गया ! इससे पहले रुपेश को राष्ट्रीय स्तर पर अखिल भारतीय साहित्यिक एवं कला संस्थान “संस्कार भारती, नोयडा” द्वारा शताब्दी साहित्य कुम्भ में चलने वाले दस दिवसीय सम्मेलन में श्रेष्ठ आने पर “पद्मश्री डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर सम्मान” से सम्मानित किया जा चुका है साथ ही हिंदी दिवस पर “विश्व हिंदी सचिवालय, मौरीशस एवं न्यू मीडिया सृजन संसार ग्लोबल फाऊंडेशन द्वारा होने वाले अन्तराष्ट्रीय ऑस्ट्रेलिया द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सम्मेलन मे सम्मानित किया गया ! “ब्रिटिश वर्ल्ड रिकॉर्ड – 2020” लंदन से जुलाई मे सम्मानित किया जा चुका है। साथ ही भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन प्रतियोगी संस्था “स्टोरी मिरर इंडिया, मुंबई” के द्वारा “लीटररी कैप्टन एवं कर्नल की उपाधियों से उन्हें सम्मानित किया जा चुका है ! इसके अतिरिक्त ‘ऑल इंडिया हिंदी उर्दू एकता ट्रस्ट(रजि) संस्था से “साहित्य साधक”, साहित्य संगम संस्था इंदौर से ‘अभ्युदय सम्मान, राष्ट्रीय सखी साहित्यिक संस्था, असम, आदर्श साहित्य समाज इंडिया भोपाल, कलम की सुगंध हरियाणा से वे सम्मानित किये जा चुके हैं ! भारत की राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था “राष्ट्रीय राजभाषा पीठ प्रयागराज” का पहला सम्मान’ भारती भूषण ‘ महान कहानीकार डॉक्टर संत कुमार टंडन “रसिक” जी के कर कमलों द्वारा 2011 मे रूपेश कुमार को प्रदत किया गया था। इसी से शुरु हुई इनकी साहित्यिक यात्रा अनवरत जारी रही। इन्हें विभिन्न विधाओं मे कई अवसरों पर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों व साहित्यिक पत्रिकाओं द्वारा विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है! इनकी योग्यता, प्रतिभा, कार्यकुशलता व कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए 2018 मे अखिल भारतीय साहित्यिक संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह संस्थापक नवलपाल प्रभाकर “दिनकर” जी के द्वारा संस्था के राष्ट्रीय महासचिव के लिए नामित एवं सम्मान किया गया। यह संस्था आज साहित्य की दिशा मे निशुल्क निस्वार्थ भाव से कार्य करती हुई लगातार सफलता की ओर बढ़ रही है ! इनकी हाल ही मे प्रकाशित पुस्तक “मेरी कलम रो रही है” काफी चर्चा में है और ऑनलाइन / ऑफ़लाईन तेजी से बिक रही है! अब तक के इनके साहित्यिक सफर में इन्हें 200 से ज्यादा विभिन्न राष्ट्रीय,अंतराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है! विज्ञान के छात्र रूपेश कुमार के लिए साहित्य उनका शौक है तथा समाज के नवनिर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।