हाँ, मैं स्त्री हूँ…

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हाँ, मैं स्त्री हूँ
अपने होने के वजूद पर गर्व करती हूं
मुझे नहीं बनना बुद्ध, राम और श्याम
मुझे तो अपने यशोधरा, सीता और राधा
होने पर गर्व है
मैं क्यों छोड़ कर घर अपना
भटकूं सत्य की तलाश में
जंगलों में, वीरानों में
मेरा सत्य तो मेरा परिवार है
जिसकी मैं धुरी हूंँ
संस्कारों की, सभ्यताओं की जननी हूं
सत्य तो मेरे संस्कारों में पलता है
मेरी कोख में है नए जीवन का निर्माण
मैं हरती हूँ पीड़ा जग की
अपने वात्सल्य भाव से
सजाती हूँ,सवाँरती हूँ
अनंत सी सृष्टि को
देती हूं रूप अपना
पाती हूं संपूर्णता को ।
दुर्गा बनकर नष्ट करती हूं
अपने कुसंस्कारित बच्चों को
राह जो विनाश की थाम लेते हैं।
मेरे अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाने वालों
नहीं देना अपने होने का प्रमाण
क्योंकि मैं ही तो धरती हूंँ
श्रृंगार हूं इस सृष्टि का।
क्या मेरे अस्तित्व के बिन
पुरुष का कोई अस्तित्व नजर आता है
उसकी संगिनी हूं ,गुलाम नहीं
उसकी प्रिया हूँ ,जायदाद नहीं
हमसफर हूँ , मुफ्त की खैरात नहीं
सामजस्य ही रहता है मेरे संग
जबरदस्ती अधिकार नहीं
कोमल हूँ , कमजोर नहीं
दृढ़ प्रतिज्ञ हूँ ,कठोर नहीं
हाँ मैं स्त्री हूँ
इंसान हूँ
बोझ नहीं
मत रौंदों मुझे
गर्भ में, दहेज में, बलात्कार में
रिश्ता हूँ, त्योहार हूँ ।

स्मिता जैन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।