बेटियां

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मां की मुस्कान है बेटियां,
पिता की शान है बेटियां।
ससुराल की बहु है बेटियां।
मायके की मेहमान है बेटियां।

बेटों से कम नहीं है बेटियां,
हर क्षेत्र में आगे है बेटियां।
बेटे खाना बनाते है होटलों में,
अब खाती है होटल में बेटियां

अब जहाज उड़ाती है बेटियां,
रेल बस मैट्रो चलाती बेटियां।
इससे ज्यादा क्या कहे हम ,
अंतरिक्ष में पहुंच गई बेटियां।

पढ़ाई में भी पीछे है नहीं,
बहुत आगे है हमारी बेटियां।
84 प्रतिशत अंक लाते है बेटे,
90 प्रतिशत लाती है बेटियां।

शहरों की छोड़ो अब बाते,
गावों में पढ़ने जाती है बेटियां
बेटों को पढाती है अब बहूये,
जो किसी घर की है बेटियां।।

राजनीति में भी पीछे नहीं,
उसमे भी आगे है बेटियां।
एक नहीं है हजारों है नाम,
जो किसी की है वे बेटियां।।

बहुत से सर्वोच्च पदो पर भी,
आसीन रही है बहुत बेटियां।
प्रतिभा पाटिल,सुमित्रा मीरा,
वे भी थी किसी की बेटियां।।

जो काम करते थे कभी बेटे,
वो आज कर रही हैं बेटियां।
अपने पिता को मुख्याग्नी भी,
आज दे रही है ये बेटियां।।

तोड़े है सभी रीति रिवाज,
जो फैले है अपने समाज में।
देती हैं कंधा शहीद पति को,
ले जाती है उनको श्मशान में।

करती हैं अपने देश की रक्षा,
खड़ी है सीमा पर ये बेटियां।
फौज में भरती होकर ये अब,
दुश्मन से लड़ रही हैं बेटियां।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।