मोबाइल पर घर आया स्कूल

Read Time1Second

उस दिन मुझसे बेटी ने कहा-पापा घर में आप अंडरवियर और बनियान में इधर-उधर
न घूमा करें क्यों कि मोबाइल पर अब स्कूल घर पर आ गया है। कल मोबाइल पर
मिस मुझे पढ़ा रही थी तब आप अंडरवियर और बनियान में मेरे पीछे घूम रहे थे।
यह दृश्य देखकर मिस शर्मा गयी थीं और मुझसे पूछा था कि तुम्हारे घर में
कैसा बदतमीज नौकर है जो अंडरवियर और बनियान में बेधड़क इधर-उधर घूमा करता
है। तब मैंने मिस से कहा कि ये मेरे घर का नौकर नहीं, बल्कि मेरे पापा
हैं जो घर पर हाफ पैंट, अडरवियर या बनियान में घूमा करते हैं।
बेटी की बातों को सुनकर मैं सकते में आ गया और खुद में सुधार लाने की
कोशिश करने लगा। बाद में सोचा कि यह सच है कि अब स्कूल मोबाइल की सवारी
करके घर तक आ पहुंचा है। इसलिए मुझे भी उस स्कूल के कायदे कानून और उसमें
पढ़ाने वाली मिसों का ख्याल रखना चाहिए। लेकिन मुझे याद है कि एक बार गलती
से बेटी मेरा मोबाइल अपने बैंग में लेकर स्कूल चली गयी थी तो इसी मिस ने
मुझे बुलाकर कहा था कि आपको शर्म नहीं आती कि आप बच्ची को मोबाइल के साथ
स्कूल भेज देते हैं। तब मैंने बेटी की गलतियों का अहसास करते हुए उनसे
क्षमा मांग लिया था और कहा था कि अब मेरी बेटी मोबाइल नहीं देखा करेगी।
इसके बाद मैंने बेटी को मोबाइल देना बंद कर दिया था। लेकिन जैसे ही
कोरोना युग शुरू हुआ तब उसी स्कूल के प्राचार्य ने मुझे काल करके कहा कि
आप बच्ची को मोबाइल दिया करें क्यों कि अब बच्चियों को मोबाइल पर ही
पढ़ाया जा रहा है। इसके बाद सोचा कि स्कूलों के भी सिद्धांत समय के
साथ-साथ बदलते रहते हैं। कल तक जो स्कूल बच्चों को मोबाइल देने से मना कर
रहे थे अब वे अभिभावकों को उन्हें मोबाइल देने सलाह दे रहे हैं।
यह सब देख-सुनकर मेरी पत्नी ने मुझसे कहा कि आने वाले दिनों में मोबाइल
स्कूल भी खुलेंगे। तब बच्चे स्कूल नहीं जायेंगे और मोबाइल पर ही पढ़ाई
करके उंची डिग्रियां हासिल करेंगे। जब लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे
तब उन्होंने चरवाहा विद्यालय, पहलवान विद्यालय खोला था।
मैंने कहा तुम ठीक कहती हो। अब जबकि गूगल और मोबाइल ही दुनिया के ज्ञान
गुरु हो गये हैं तो कुछ भी संभव है। अब तो मोबाइल पर विवाह भी हो रहा है।
मोबाइल पर अदालते लगायी जा रही हैं। जज से लेकर वकील और मुवकिल तक मोबाइल
अदालत में मौजूद रहते हैं। जबकि परिवार के टूट जाने की सुनवाई ऐसी अदलत
में चल रही होती है और दूसरी और मौजूद लड़की अदालत के निर्णयों पर असहमति
जताते हुए अपना मोबाइल स्वीचआफ कर लेती है तो अदालत को सुनवाई बंद करनी
पड़ती है।
आगे मैंने कहा सभी प्रकार की दुकानें मोबाइल पर खुल गयी हैं। यहां तक कि
विश्वविद्यालयों के द्वारा वेविनार का आयोजन किया रहा है। एक समय ऐसा भी
आयेगा जब सरकार को मोबाइल विश्वविद्यालय और मोबाइल स्कूल खोलने पड़ेंगे।
तब ऐसे विश्वविद्यालय के कुलपति को मोबाइल कुलपति, मोबाइल प्रोफेसर,
मोबाइल स्कूल, मोबाइल प्राचार्य के नाम से जाना जायेगा।

नवेन्दु उन्मेष
रांची (झारखंड)

1 0

matruadmin

Next Post

समाज और परिवार के लोगों की जागरुकता से रुक सकती है आत्महत्याएँ

Thu Jun 18 , 2020
सुशांतसिंह यह नाम हर जुंबा पर है। शायद जो लोग उस प्रतिभा सम्पन्न लड़के को पहले नहीं जानते थे। वे भी आत्महत्या के बाद उसे जानने लगे। उसके काम की तारीफ करने लगे और आत्महत्या को घिनौना काम बताते हुए दार्शनिक अंदाज में आत्महत्या को कायराना हरकत बता कर अपने […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।