विहिप ने की वेब जगत के लिए राष्ट्रीय नियामक बोर्ड बनाने की मांग

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केन्द्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री को भेजा पत्र

                 नई दिल्ली। मई 28, 2020। वेब-जगत(www) के बढ़ते दुष्प्रभाव से बचने हेतु विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने उसे समाज व देश हित में नियंत्रित करने के लिए एक वेब-जगत नियामक बोर्ड के गठन की मांग की है। विहिप के केन्द्रीय महा-मंत्री श्री मिलिंद परांडे ने इस सम्बन्ध में एक पत्र आज केन्द्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावडेकर को भेजा है।

      पत्र में कहा गया है कि आज का युग इंटरनेट का युग है तथा विश्व कि सभी अच्छी-बुरी जानकारी व हर प्रकार का मनोरंजन आज वेब जगत में सरलता से उपलब्ध है जिसे कोई भी व्यक्ति जगत के किसी भी कोने में बैठ कर आसानी से उपयोग कर सकता है। यह वेब जगत जहां ज्ञान, सूचनाओं, जानकारियों, उपलब्धियों तथा समाचारों का सुगम व त्वरित उपलब्ध माध्यम है वहीँ इसमें अनेक विकृतियाँ भी हैं।

      वेब-जगत के दुष्प्रभावों का जिक्र करते हुए पत्र में कहा गया है कि इस के माध्यम से संसार के अनेक अधर्मों, पापों, अपराधों, दुष्कर्मो, व्यसनों, दुराचारों के साथ आतंकवाद, साम्प्रदायिकता, विद्वेष तथा देश-द्रोह तक को प्रोत्साहन मिलता है तथा धार्मिक सामाजिक व राष्ट्रीय मानविन्दुओं का उपहास उड़ाया जाता है। नन्हे-मुन्ने बच्चे, किशोर व युवा इसके आसानी से बुरी तरह शिकार बनते देखे गए हैं। इसके कारण ही अनेक लोग अपने धर्म पथ से विमुख हो कर देश, धर्म, समाज व न्याय व्यवस्था के ही नहीं बल्कि स्वयं के भी जानी दुश्मन बनते देखे गए हैं।

      श्री मिलिंद परांडे ने कहा है कि इस वेब जगत में असंख्य वेब साइट्स, वीडियो, वेब सिरीजें, एप्लीकेशन, टिक-टॉक इत्यादि 24X7 चलते रहते हैं। इन सभी के गुण-दोष दोनों ही हैं। किन्तु इनकी समालोचना या सार-सम्भाल करने वाला कोई नहीं हैं। ये पूरी तरह से अनियंत्रित निरंकुश अव्यवस्था का हिस्सा हैं। जिस प्रकार फिल्मों को प्रमाणित करने के लिए फिल्म सर्टिफिकेशन बोर्ड है तथा टीवी सीरियलों को भी उनके प्रसारण पूर्व बारीकी से जांचा-परखा जाता है। इस प्रकार की कोई व्यवस्था इस सम्पूर्ण वेब जगत पर लागू नहीं होती।  

      विश्व हिन्दू परिषद ने मांग की है कि वेब जगत के दोषों के निवारण तथा उसे समस्त भारत-वासियों के लिए सर्वथा उपयोगी बनाने हेतु भारत से अपलोड होने वाले या भारत में दिखाए जाने वाली समस्त वेब जगत की सामग्री की जांच व प्रमाणन की उचित व्यवस्था हो। इसके लिए एक वेब जगत नियामक बोर्ड बनाया जाए जिससे इसके दोषों को दूर कर सभी के लिए उपयोगी बनाया जा सके।

भवदीय
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता,

विश्व हिंदू परिषद

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।