नारी

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लुटती है पिटती है अभावो में रहती है
संघषों की जिंदगी भी हंसकर सहती है
गमों के सागर मे हरदम वो बहती है
कष्टों को सहकर किसी से ना कहती है
कभी बसों में कभी कारों में हाट बाजारों में
तीज और त्योहारों में मेघ और मल्हारों में
इज्ज़त उतारी है कभी पीटा है मारी है
रोते ही रोते जिसने उम्र ये गुजारी है
जालिम जमाने की करतूते सारी है
औरत तो अबला है बेबस बेचारी है
रोते ही रोते जिसने उम्र ये गुजारी है
जिंदगी सारी पति पे बच्चों पर वारी है
त्याग की मूरत है तपस्या की सूरत है
जीवन मे आज सबको उसकी जरूरत है
मेहंदी लगाएगी खुद को सजाएगी
तबाह हुए सपनो को फिर महकाएगी
भूखी रहेगी प्यास भी सहेगी
उम्मीदों की लहरों मे फिर से बहेगी
अपनी दर्द भरी कहानी ना किसी को सुनाती है
करवाचौथ को पत्नी पति की उम्र क्यों बढाती है।

नमोकार जैन “नमन”

परिचय:

नमोकार जैन “नमन”(साहित्याचार्य)

आत्मज- मुकेश चन्द जैन

गुढाचन्द्र जी,तह.नादौती, जिला करौली (राजस्थान)

वर्तमान पदस्थापना..संस्कृत शिक्षक,मुरैना

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।