आओ अब लौट चलें

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shubham
हम सभी के जीवन में,
अक्सर आती है
एक नई सुबह..
आपने सोचा कि
क्यों प्रतिदिन
एक नई सुबह आती है।
जीवन को बेहतर
बना लो या बदतर,
पर होता ये है
दिन दिन करके
कुछ बदल जाता है।

हम,हमारा व्यवहार,
हमारा प्रेम और हमारी प्रीति..
इस तरह सबकुछ बदल जाता है
और लोग कहते हैं
‘जमाना बदल गया’।

बस इतना है आपसे
और मुझे खुद से है कहना,
प्रतिदिन की तरह आएगी
जब हमारे जीवन में नई सुबह..
तब हमें निर्माण की ओर जाना है
अपने और अपनी पीढ़ी को
पतित होने से बचाना है।

अब तक जो हमारी स्वयं तक
ही रह गई है सीमित सोच..
उसको हटाना है
और इस बार हमें एक
नए और सुखद
जीवन की ओर जाना है।।

संस्कारित जीवन बनाना है,
क्योंकि हमने अपने
बुजुर्गों से बहुत कुछ पाया है..
उसी धरोहर को लौटाना है।
आप ज्यादा तो नहीं सोच रहे,
अरे ज्यादा कुछ नहीं
भारत को पुनः
सोने की चिड़िया बनाना है।।
#शुभम जैन

परिचय : मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले के पृथ्वीपुर में शुभम जैन रहते हैं। सिर्फ २१ वर्ष के होकर शुभम जैन अध्ययन के साथ ही टीकमगढ़ में जैनाचार्य श्री विद्यासागर पाठशाला का संचालन भी करते हैं। आप आचार्य श्री विद्यासागर जी के समस्त संघ के लिए समर्पित हैं। लेखनी के जरिए आप निरन्तर धार्मिक गतिविधियों से जुड़ रहते हैं।

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।