जो मजाक दु:ख देता है।वह मजाक कभी नहीं होता है।

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  छोड़ो सम्माननीयों।कैसी सतयुग की बातें कर रहे हो।यह कलयुग है और कलयुग में वह मजाक मजाक ही कहां होता है?जो सामने वालों को गहरा दु:ख ना दे।  

आदरणीयों मजाक मजाक में अंतर होता है।एक में मजाक किया जाता है और दूसरे में मजाक उड़ाया जाता है।जैसे लंगड़े को लंगड़ा कह कर, गंजे को गंजा, काने को काना, गूंगे को गूंगा, कम सुनाई देने वाले को बहरा और पागल को पागल कह कर मजाक उड़ाना शामल है।इसमें यदि पीड़ित विरोध करे तो यह कह कर और अधिक दु:खी करते हुए कहना कि यार मैं तो मजाक कर रहा था।
उक्त तथाकथित बुद्धिमानों का उक्त मजाक हर दिन की दिनचर्या है।जबकि पीड़ितों पर इसका प्रभाव उक्त कहावत ‘चिड़ियों की मौत और गंवारों की हंसी’ चरितार्थ होती है।इसके बावजूद उक्त दु:खदायिक मजाक कर्ताओं का सुवह, दोपहर व रात का खाना नहीं पचता और तब तक नींद नहीं आती।जब तक वो उक्त पीड़ितों को मजाक के रूप में कष्ट ना दे दें।जो अत्यंत निंदनीय अपराध है और वर्तमान सरकार के टाएं-टाएं फिस हो चुके दिव्यांगता अधिनियम 2016 में दण्डनीय भी है।

#इंदु भूषण बाली

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।