सॉनेट

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अच्छे दिन की बातें करके सत्ता पाकर,
मद में सब नेता सत्ताधारी गर्वित हैं।
जनता को अब कौन पूछता है फुसलाकर।
केसरिया रँग को धारे बनते धर्मित हैं।

कमर तोड़ती मँहगाई जनता पर भारी।
चीख पुकार रही है जनता।नहीं सहारा
दिया किसी ने।रोक नहीं कोई सरकारी।
पाई पाई को तरस रहा श्रमिक बिचारा।

शोषित,पीड़ित,गरीब,श्रमिक,किसान पूछता
होगा कब मेरा विकास यह तो बतलाओ
हर दिन हर पल हर विभाग में रहे जूझता।
लेकिन उसका विकास कहाँ जरा दिखलाओ।

केवल सरकारें आती जाती रहती हैं।
विकास की बातें मन भरमाती रहती हैं।

नाम- नवल किशोर शर्मा ‘नवल’
पिता- श्री किशन स्वरूप शर्मा
शैक्षिक योग्यता – एम.ए.,बी.एड.(अंग्रेजी ),
एल.एल.बी.
जन्मभूमि-मुरादाबाद ( उ. प्र. )
कर्मभूमि- सिल्वर स्टोन पब्लिक स्कूल बहजोई,सम्भल।
सम्प्रति- प्रवक्ता
पदभार -सह-साहित्य प्रमुख, संस्कार भारती मेरठ प्रान्त शाखा बहजोई, सम्भल।
शौक – कविता लेखन व गायन, पुस्तक पढ़ना।
साहित्यिक योगदान -विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।
साहित्यिक सम्मान – ‘कवि भास्कर’ उपाधि से विभूषित द्वारा संस्कार भारती मेरठ प्रान्त शाखा सम्भल, उ प्र।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।