गुर्जर राष्ट्र वीणा :गुजरात की हिन्दी साहित्य पत्रिका

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आद्य संपादक: स्व जेठलाल जोषी
प्रबंध संपादक :श्री शरद जोषी
अंक :अक्तूबर दिसंबर २०१९
समीक्षा :
समीक्षक : डॉ गुलबचन्द पटेल
गुर्जर राष्ट्र वीणा का दिसंबर २०१९ का सुंदर मुख पृष्ठ वाला अंक गुजरात के राष्ट्र तिरंगा के रंगो से छपे मेप और श्री नरेंद्र भाई जोषी संपादक की हिन्दी सेवी सम्मान भोपाल साहित्य अकादमी की ओर से महा माहिम राज्यपाल मध्यप्रदेश के माननीय श्री लालजी टंडन से स्वीकार करते हुए की सुंदर तस्वीर वाला मुख पृस्ठ से सजा हुआ हे। यह पत्रिका गुजरात प्रांतीय राष्ट्र भाषा प्रचार समिति अहमदाबाद से पब्लिश होती हे। इस समितिका गठन स्व जेठलाल जोषी ने ६९ पहले किया था।
अंदर के पेज पाए स्व जेठलाल जोषी की ३१ वी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि की तस्वीर ,और स्व श्री अरविंद जोषी जी पूर्व संपादक की ९ वी पुण्य तिथि पर श्रद्धांजली देते हुए सुंदर तस्वीर छपी हे,उन्हे हम भी श्रद्धांजली अर्पित करते हे।समिति के द्वारा चलाये जाने वाले आगामी कार्य क्रम की सूची भी इसी पेज पर देखने को मिला जो इस प्रकार हे।
१। जनवरी से जनवरी जनसंचार पत्रकारिता मे प्रवेश का आयोजन
२। १० जनवरी विश्व हिन्दी दिवस पर परी संवाद

३, सरदार वल्लभ भाई पटेल विषय पर वकृत्वा स्पर्धा १९ जनवरी २०२०
४। जेठलाल जोषी विषय पर वक्त्र्त्व स्पर्धा १९ जनवरी २०२०
५। पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन १९ जनवरी २०२०
६। अखिल गुजरात हिन्दी प्रचारक सम्मेलन एवं जेठलाल जोषी हिन्दी सेवी पुरस्कार समारोह २ फरवरी २०२० ,जो सूची मे हे यह कार्यक्रम अंबाबा इंग्लिश गर्ल्स स्कूल सूरत मे अखिल भारतीय गुजरात राष्ट्र भाषा हिन्दी प्रचारक सम्मेलन का आयोजन किया गया हे।
श्री शरद जोषी जी ने हिन्दी राष्ट्र भाषा सेवी सम्मान की जानकारी अपने समपादकीय लेख मे दी हे,उनहो ने शिव सागर शर्मा की पंक्तिया भी अपने आलेख मे शामिल की हे। पंक्तिया इस तरह हे।
हिन्दी हल्दी घाटी हे,
हिन्दी विपप्लव की माटी हे,
आजादी की आगरा कमान
हिन्दी भाषा को प्रणाम
मेरे देश की महान
हिन्दी भाषा को प्रणाम
हिन्दी की जय डॉ राम स्नेही,भारत,हाइकु ,मेरे बापू, श्रीमति उमा निगम,सुमित्रा रीवा ,कुण्डलिया ,दोहे,डॉ ऋषिपाल अहमदाबाद ,डॉ किशोर काबरा,उमा श्रीवास्तव और सेवा राम गुप्त ने दिया हे।
रमेश मनोहर की एक अच्छी गजल भी दी गई हे। डॉ ऋषिपल की भी गजल देखने को मिला। राम किशोर मेहता की आफत कविता,बाबूजी का छाता,अंधेरा हे भाई ,राजेंद्र पटेल,अंधेरा,रोटी,दक्षा पटेल ने अनुवाद किया गया हे। विश पायी अपने पुरख ,हम लोह के चने चबाते,बंद शीशे को झाँकती,

हमने क्यो छोड़ा,कांति अय्यर ,की कविताए देखने को मिला।दो लघुकथा ये माँ की किन्नर बेटी,अंधा और भिखारी,डॉ पुरेश चंद ने दिया हे।ये बहुत ही अच्छी हे।लघु कथा विराट वामन ,,अंतिम प्रश्न ,नीलम जोषी पोरबंदर,ईश्वर और अल्लाह के बीच त्रि शंकु बन जाने की बात अपनी लघु कथा मे की हे। डॉ प्रभु चौधरी उज्जन ,ने राष्ट्र भाषा व विकाश मे बाधक अँग्रेजी की बात अपने लेख मे की हे। यदि बिहार,झारखंड ,छतीसगढ़,मध्य प्रदेश,उत्तर प्रदेश,राजस्थान,दिल्ली,हरियाणा,हिमाचल प्रदेश,उत्तरा खंड ,जम्मू व चंदिगढ़ आदि क्षेत्रो मे पूर्णतह अँग्रेजी को हटाकर हिन्दी लागू किया जाय तो संशया का हल उन्होने बताया हे।
गोस्वामी तुलसीदास की रचना धर्मिता,पर विहंगम द्राष्टि डालने का प्रयास डॉ नवीन प्रकाश सिंह ,नवीन ने अपने आलेख भक्त प्रवर गोस्वामी तुलसीदास :युग बोध के दर्पण,मे किया हे। गोस्वामी जी क्रांतिकारी कवि ,चिंतक,सच्चे राम भक्त ,थे,उनहो ने रामचरित मानस की भेट की हे।
ऋषिपल घिमान हिन्दी गजल के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर –आलेख मे हरे राम नेमा ‘समीप’ ने बताया हे की,ऋषि पल हिन्दी के सुपरिचित गजल कार हे,तीस बरशो से गजल लिख रहे हे,ऋषि पाल उत्तरांचल से हे,उनके हिन्दी मे तीन पुस्तक गजल संग्रह १ शबनम का एहसास ,२ हवा के कंधे पर,३ जो छूना चाहु तो,प्रकाशित हे। वे अहमदाबाद की प्रतिष्ठित संस्था ‘साहित्य लोक’ के उपाध्यक्ष हे।
मिसाइल मेन डॉ अब्दुल कलाम ज पर आलेख बिना के आर्य ने दिया हे,डॉ कलाम का जन्म १५ अक्तूबर १९३१ मे रामेश्वर तमिलनाडू मे एक छोटे से द्वीप मे हुआ था। जो प्रकृतिक सौन्दर्य से भरपूर हे,डॉ कलाम को बचपन मे जब वे पाँचवी कक्षा मे पढ़ते थे तब उन्हे उनकी टोपी के कारण उन्हे शिक्ष ने अंतिम बेंच पर उन्हे बिठाये गए थे,जाती धर्म के कारण ये हुआ था।
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उनके पिताजी ने शिक्षक को कहा की,आप सामाजिक असमानता और धार्मिक असहिस्नुता का जहर मत घोलिए,शिक्षक ने उनकी माफी मांगी थी,अब्दुल कलाम युवा ओके लिए महान व्यक्तित्व और प्रेरणा श्रोत हे। उन्होने भारत का सर्वोच्च पद रास्तर्पटी बनकर देश की सेवा की थीए पी जे कलाम की पाँच बाते याद रखने जेसी हे। ये इस प्रकार हे।
१ मे सबसे अच्छा हु
२ मे यह कार सकता हु
३ भगवान हमेशा मेरे साथ हे
४ मे एक विजेता हु
५ आज का दिन मेरा दिन हे
भारत के महान वैज्ञानिकने माँ काव्य लिखा था,माँ तेरी उंगुलियों ने निथारा था दर्द मेरे बालो से –यह लेख बहुत ही उम्दा हे।
पुस्तक हरसिंगार की समीक्षा तुम झरते रहना,सुगंधित भावो से सुरम्य अभिव्यक्ति,डॉ धनंजय शर्मा ‘जदली’ अहमदाबाद ने की हे।
लघु कथा अब मे ,नसीम महुवाकर ने दिया हे। आधुनिक भारतीय भाषाओ का शब्द भंडार :एक अनुशीलन …..डॉ मालती दुबे जी के आलेख के संदर्भ मे डॉ जैनेन्द्र जैन ने समीक्षा किया हे।डॉ मालती बहन दुबे गुजरात विध्यापीठ की भाषा साहित्य विभाग की निवृत अध्यापिका हे,
भारतीय भाषा के शब्दो का एक अनोखा और उपयोगी शोध कार्य डॉ मालती दुबे जी ने अमरीका स्थित केलिफोर्निया युनिवेर्सिटी किया हे, लिंगविसटीक डिपार्टमेंट मे पोस्ट डालकर रिसर्च के रूप मे सम्पन्न किया हे। डॉ मल्टी दुबे मूलतःबनारस की हे।
सामी के मापदंड सजाती गुजरात की हिन्दी कवियित्रि डॉ नलिनी पुरोहित की सरल रामायण की समीक्षा –श्रीमति प्रतिभा पुरोहित ने की हे,सरल रामायण मे भावनाओ का प्रवाह सतत बहता रहता हे,ईएसए प्रतिभा पुरोहित जी ने अपनी समीक्षा मे कहा हे। श्री राम के प्राकट्य होने के उनके जीवन की सम्पूर्ण लीला ओ का अद्भुत वर्णन इस सरल रामायण मे दिया गया हे।
तस्वीर लिख रहा हु-पुस्तक की समीक्षा कृष्ण सुकुमार ने किया हे,उसके लेखक ऋषिपाल घिमान ‘ऋषि’हे। ये गजल संग्रह हे। उनकी गजल की कुछ पंक्तिया इस प्रकार हे।

“तेरे दिवानों का बेशक मेरा शुमार नहीं,
तेरी निगाह का भोला शिकार मे भी था,
चुका दिये थे सभी कर्ज मैंने दुनिया के,
बस अपने आप पे बाकी उधर था “
-ऋषिपल घिमान’ऋषि’
अंत मे हिन्दी समाचार दिये गए हे,उसका संकलन शरद जोषी जी ने किया हे।
आनद उत्साह ,गौरव,प्रोत्साहन देने वाले मध्य प्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति भोपाल के सभी पदाधिकारी ओ का गुजरात प्रांतीय राष्ट्र भाषा प्रचार समिति ने अहमदाबाद के श्री नरेंद्र भाई जोषी,शरद जोषी,शंकरभई पटेल,राजेंद्र पटेल,वासुदेव भाई पटेल ,और गोविंद भाई चौधरी ने अंतिम पेज पर रंगीन अक्षरो मे आभार प्रकट किया हे।
“ गुर्जर राष्ट्र वीणा“गुजरात की एक सुंदर और प्रसिध्ध हिन्दी साहित्य पत्रिका हे। उसका आजीवन शुल्क १५०० रुपए हे। प्रति अंक मूल्य ४० रुपए हे,हर माह की २० तारीख को ये प्रकाशित होता हे। गुर्जर राष्ट्र विना के लेखको को उनकि की प्रकाशित रचना वाला अंक निःशुल्क भेजा जाता हे, सदश्यता के लिए संपर्क :
संपादक:
राष्ट्र भाषा हिन्दी भवन अहमदाबाद ,
दूर भाष :२६४६४५०७
ईमेल: rashtra bhashahindibhavan@gmaildotcom

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।