नाजुक रिश्ते

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बहुत नाजुक से हो गए है आजकल ये रिश्ते,
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!
अकड़ बढ़ गयी हो औऱ हो टूटने के कगार पर,
तो कभी तुम झुक जाओ कभी उसे झुका लो।
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

दूरियां बहुत बढ़ गयी हो, और खलने लगे हो फासले!
तो कभी तुम साथ बैठ जाओ कभी उसे बिठा लो!!
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

आखों में उमड़ता हो सैलाब, और बहे आंसू बार बार,
तो कभी तुम खुद हंसलो औऱ कभी उसे हसांलो!!
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

भरने लगे जहर मन मे, औऱ बढ़ने लगी हो नफ़रतें।
तो कभी तुम गले लग जाओ कभी उसे गले लगालो!
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

शांति हो जब हर ओर, औऱ खामोशी छाई हो रिश्ते में!
तो कभी खुद तुम रो पड़ो औऱ कभी उसे रुला लो!!
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

दिल मे दर्द बेशुमार हो, पर टूटने न देना रिश्ते को!
कुछ बातें वो भूल जाये और कुछ बातें तुम भुला लो!
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

पराया नही अपना है रख, उसकी गोद मे सिर “मलिक”
कभी वो तुम्हे मना ले और कभी तुम उसे मना लो!
अपने हर रिश्ते को कुछ इस तरह से निभा लो!!

#सुषमा मलिक “अदब”
परिचय : सुषमा मलिक की जन्मतिथि-२३ अक्टूबर १९८१ तथा जन्म स्थान-रोहतक (हरियाणा)है। आपका निवास रोहतक में ही शास्त्री नगर में है। एम.सी.ए. तक शिक्षित सुषमा मलिक अपने कार्यक्षेत्र में विद्यालय में प्रयोगशाला सहायक और एक संस्थान में लेखापाल भी हैं। सामाजिक क्षेत्र में कम्प्यूटर प्रयोगशाला संघ की महिला प्रदेशाध्यक्ष हैं। लेखन विधा-कविता,लेख और ग़ज़ल है। विविध अखबार और पत्रिकाओ में आपकी लेखनी आती रहती है। उत्तर प्रदेश की साहित्यिक संस्था ने सम्मान दिया है। आपके लेखन का उद्देश्य-अपनी आवाज से जनता को जागरूक करना है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।