विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलसचिव बने श्रीगोपाल नारसन

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रुड़की |

विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के वर्धा में हुए वार्षिक अधिवेशन में विद्यापीठ के उत्तराखंड प्रभारी श्रीगोपाल नारसन को विद्यापीठ के उपकुलसचिव की भी केंद्रीय स्तर पर अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है।विद्यापीठ के अधिष्ठाता डॉ योगेन्द्रनाथ शर्मा अरुण की अध्यक्षता में हुई पीठ की सीनेट बैठक में मुम्बई के डीके मुरारका को कुलानुशासक, विदर्भ के साम्भा जी राव को उपकुलपति व उत्तराखंड के श्रीगोपाल नारसन को उपकुलसचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।पीठ के कुलसचिव डॉ देवेंद्र नाथ शाह ने बताया कि इस अधिवेशन में देशभर से तीन सौ साहित्यकार प्रतिभागियों ने भाग लिया है।अधिवेशन में पीठ की महाराष्ट्र शाखा की ओर से अधिष्ठाता डॉ अरुण व डॉ नारसन का शाल ओढाकर व स्मृति चिन्ह देकर सारस्वत सम्मान से विभूषित किया गया।इस अवसर पर उत्तराखंड से साहित्यिक योगदान के लिए फ़िल्म निर्देशक डॉ सुभाष अग्रवाल को विद्या सागर,अशोक शर्मा आर्य,राजेश शर्मा,एसपी सिंह को विद्यावाचस्पति की मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।