हिन्दी भाषा प्रेम की…

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हिन्दी है सबसे सरल, भारत की पहचान ।

हिन्दी भाषा में बसा, भारत का सम्मान ।।

शब्द-शब्द में लोच है, अक्षर अक्षर गोल ।

हिन्दी जैसा है यहाँ, दुनिया का भूगोल ।।

अपनी भाषा बोलियाँ, कभी न जाना भूल ।

अपनी भाषा जब मिले, खिलते मन के फूल।।

भाषा का सच जानिए, यही ज्ञान का मूल ।

अपनी डाली छोड़कर, भटका है हर फूल।।

अपने श्रम औ’ भाग्य पर, करे पूर्ण विश्वास।

हिन्दी के बल पर यहाँ, रचे नया इतिहास।।

हिन्दी भाषा प्रेम की, इसके मीठे बोल।

हर रिश्ते के साथ है, मिश्री अमृत घोल।।

हिन्दी में बातें करे, हिन्दी में व्यापार ।

हिन्दी मे कानून हो, हो भारत उद्धार।।

हिन्दी भाषा विश्व में, पहली सर्व महान।

अपनी भाषा को मिले, प्रथम मान सम्मान।।

पखवाड़े औ’ दिवस से, ना होगा उत्थान ।

हिन्दी को अब चाहिए, माँ समान सम्मान।।

आओ मिलकर हम करें, हिन्दी का सम्मान ।

हिन्दी अपने देश की, आन बान औ’ शान।।

#संदीप सृजन

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।