नयनाभिराम—गुरूदक्षिणा

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आज काॅलेज से आकर अचानक मेरे शिक्षक पति ने मुझसे कहा—जल्दी से तैयार हो जाओ आज हमें गुरूदक्षिणा देखने जाना है।गुरू दक्षिणा देखने? गुरूदक्षिणा ली जाती है दी जाती है –देखी कैसे जाती है? मैं सोच में पड़ गयी।
खैर तैयार हो ही रहे थे कि एक शानदार कार घर के दरवाजे पर रूकी।ड़्राईवर ने दरवाजा खोलकर बैठने का आग्रह किया।एक नामी सम्भ्रांत काॅलोनी के एक बड़े से बंगले में कार ने प्रवेश किया।एक सज्जन और महिला स्वागत के लिये खड़े दिखे, जैसे ही कार से उतरे दोनों पास आकर पैरों में झुक गये।मैड़म प्रणाम!सज्जन के बोलते ही मैं आश्चर्यचकित रह गई।इनका स्टूड़ेंट सामने खड़ा था—विनय। 15साल पहले विनय मेरे पति से ट्यूशन पढने आता था। दुबला पतला , गंभीर विनय। बेहद गरीब परिवार से था। पिता नहीं थे और मां पापड़ बनाकर बेचती थी और बड़े ही संघर्ष में दो बच्चों को पढा रही थी।मन उस स्त्री के लिये सम्मान से भर गया। मेरे कहने पर शिक्षक पति ने उसे तीन साल तक बिना फीस के पढाया।
आखिरी साल में विनय फीस देने का आग्रह करने लगा ,पति के मना करने पर वो स्वाभिमानी बालक मुझसे आग्रह करने लगा –मैड़म आप बोलिये सर को गुरूदक्षिणा तो लेनी चाहिये। तब मैंने उसे अचानक ही कह दिया- ठीक है गुरूदक्षिणा हम लेंगे। तुम होशियार हो, काबिल हो , एक दिन जरूर कुछ बन जाओगे, बड़े आदमी हो जाओगे। धन, दौलत , नाम सब कमाओगे पर एक बात कभी मत भूलना-अपनी मां का संघर्ष।बड़े ही तकलिफ और संघर्ष से वो तुम्हारा जीवन संवार रही है। बड़ा आदमी बनने के बाद भी उसका सम्मान बरकरार रखना।उसके सुख की पहले सोचना।उसे किसी बात से कभी तकलिफ ना हो। बस यही हमारी गुरूदक्षिणा है।उस वक्त हमें प्रणाम करके विनय हामी भरकर चला गया।
आज वही विनय हमारे सामने खड़ा था।विनय बड़े आदर के साथ हमें बंगले के अंदर ले गया।उसका वैभवपूर्ण संसार हम बड़े ही आश्चर्य और प्रसन्नता से देख रहे थे।
तभी एक गरिमामयी महिला बाहर निकलकर आई।विनय ने हमें उनसे मिलवाया।सर! मैड़म! मेरी मां, मेरी भगवान।देख लिजिये आज मैंने आपकी गुरूदक्षिणा पूरी कर दी।मैं आज बहुत बड़ा बिजनैसमैन हूं।सारा व्यवसाय, सारी सम्पत्ति मां के नाम है, मैं बस कर्मचारी हूं। मां से पूछे बगैर घर का पत्ता भी नहीं हिलता। विनय की मां की आंखों में बेटे के प्रति प्यार और गर्व दिखाई दे रहा था और मैं और मेरे पति उस नयनाभिराम गुरूदक्षिणा को पाकर निहाल हुऐ जा रहे थे।

    #सुषमा व्यास

परिचय : श्रीमती सुषमा व्यास( सुष ‘राजनिधि’) ने हिन्दी साहित्य में एमए किया हुआ है और मौलिक रचनाकार हैं।आप इंदौर में ही रहती हैं तथा इंदौर लेखिका संघ की सदस्य भी हैं। 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।