समंदर हो गया हूं

Read Time0Seconds

पहले से और बेहत्तर हो गया हूं
मै टूटकर अब पत्थर हो गया हूं।
नदियां खूद आती है मिलने मुझसे
मै खूद मे एक समंदर हो गया हूं।
इतनी चोट की वक्त और हालात ने
टुकडा था,अब खंजर हो गया हूं।
ये शानो सौकत बस दिखावे की है
मै अंदर ही अंदर खंडहर हो गया हूं।
जिंदगी कहां से आज कहां आ गई
झोका सा था अब बवंडर हो गया हूं।

संजय अश्क बालाघाटी

1 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

गांधी भविष्य के भारत का यथार्थ बने रहेंगे – कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल

Wed Aug 28 , 2019
हिंदी विश्‍वविद्यालय में त्रि-दिवसीय राष्‍ट्रीय परिसंवाद का समापन वर्धा, दि.23 अगस्‍त 2019: गांधी जी अपने जीवन में निरंतर संशोधन करते थे। उनके समस्‍त जीवन दर्शन का सही और व्‍यापक मूल्‍यांकन होना अभी भी बाकी है। उनका जीवन आधुनिकता का दस्‍तावेज है। समाज के आखरी व्‍यक्ति के विकास के वे पक्षधर […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।