कुरान-गीता है

Read Time0Seconds
cropped-cropped-finaltry002-1.png
लाख ग़म है फिर भी मुस्कुराकर जीता है
कोई दिवाना हंसकर जख्मो को सीता है।
आईने में देखा है ईश्क में टुटा हुवा बशर
 किस तरह ज़िंदगी वो मर-मरकर जीता है।
न जाने क्यु दुश्मन है जमाना मोहब्बत का
मोहब्बत का तो पैगाम देते कुरान- गीता है।
लाख नफरतें है मगर ये भी सच है *अश्क*
दिल में किसी का प्यार लिये हर कोई जीता है।
संजय अश्क
पुलपुट्टा,बालाघाट
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

जल संचयन

Tue Jul 16 , 2019
बारिशों का दौर है जल से सराबोर है लबालब सड़के है जलभराव चहुं ओर है जल निकासी होती नही नालियां खाली होती नही जल संचयन गर कर ले हम वर्षा-जल को संजो ले हम जल संकट न हो कभी जल भरपूर रहे तभी  समय कम है बचा लो जल सुरक्षित […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।